इन संतों ने की यहां तपस्या
मंदिर के महंत बाबा लखनदास महाराज ने बताया कि भालू बाबा के बाद उनके शिष्य बाबा राम टहल दास ने यहां 150 वर्ष तपस्या की, फिर उनके शिष्य बाबा मुनीश्वर दास ने भी 150 साल तपस्या में गुजारे। बाद में बाबा राम गोपाल दास, राम लखन दास व ध्रूम ऋषि के शिष्यों ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया। यह एक सिद्ध पीठ भी है।
मंदिर के छोटे महंत बाबा नरसिंह दास ने बताया कि यह ऐसा मंदिर है जहां श्रद्धा भाव से आने वाले हर भक्त की मनोकामना पूरी होती है। परिसर में भोले बाबा सहित ठाकुर जी, राधा-कृष्ण, राम-जानकी, लक्ष्मी-नारायण, पंचमुखी बालाजी, दक्षिणमुखी हनुमान जी की मूर्तियां स्थापित हैं। यहां गोशाला भी है और संत सेवा भी होती है।