बरेली। ट्रक चालकों को अगर राजाओं की तरह ट्रक चलाने और किसी को भी रौंदने की आजादी दी गई तो आम लोगों का रास्ते पर चलना दूभर हो जाएगा। समाज में भय एवं अराजकता का वातावरण उत्पन्न हो जाएगा। इस तल्ख टिप्पणी के साथ अपर सत्र न्यायाधीश (त्वरित न्यायालय प्रथम) रवि कुमार दिवाकर ने ट्रक से कुचलकर सिपाही की हत्या करने के दोषी चालक को उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही, 50 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है।
घटना सुभाषनगर थाना क्षेत्र के सिटी स्टेशन के सामने नौ मार्च 2018 को हुई थी। पुलिस लाइन निवासी अमित प्रताप सिंह ने पुलिस को बताया कि संभल जिले के गुन्नौर थाना क्षेत्र के गांव रजवाना निवासी उनका साला आरक्षी धर्मेंद्र कुमार सरकारी कार्य से मीरगंज थाने से जिला मुख्यालय आ रहा था। सिटी स्टेशन के सामने धर्मेंद्र ने शिकायतकर्ता को भी बाइक पर बैठा लिया था। रात 10:45 बजे चौपुला पुल पर ट्रक ने टक्कर मार दी।
इससे अमित छिटककर गिर गया। वह ट्रक रोकने के लिए चिल्लाता रहा, लेकिन चालक नहीं रुका। धर्मेंद्र व उसकी बाइक को करीब 50 मीटर तक घसीटकर ले गया। इसके बाद चालक ट्रक छोड़कर भाग गया। उसने मौके पर जाकर देखा तो धर्मेंद्र की बाइक ट्रक के अगले पहिये में फंसी थी और धर्मेंद्र पीछे के पहियों में फंसा था। उसकी मौके पर ही मौत हो चुकी थी।
पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना की। सात जुलाई 2018 को आरोपपत्र दाखिल किया। अभियोजन की ओर से न्यायालय में नौ गवाह और 13 साक्ष्य पेश किए गए। न्यायालय ने प्रत्यक्षदर्शी विशेष पाल सिंह के बयान के आधार पर पीलीभीत जिले के गजरौला थाना क्षेत्र के गांव सिरसा सरदहा निवासी रोहित कुमार को हत्या का दोषी पाते हुए सजा सुनाई है।
माता-पिता के इकलौते थे धर्मेंद्र
न्यायालय ने कहा कि सिपाही धर्मेंद्र की उम्र 27 वर्ष थी। वह अपने माता-पिता के इकलौते थे। पुत्र को खोने का दर्द शब्दों में बया नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि पुलिस विभाग में 92 प्रतिशत अराजपत्रित कर्मचारी हैं जो सड़क पर ड्यूटी करते हैं। उनको जरूरी सुविधाएं भी नहीं मिलतीं। वे परिवार के साथ तीज-त्योहार भी नहीं मना पाते। न्यायालय ने कविता के जरिये पुलिसकर्मियों की भावनाओं का उल्लेख किया। संवाद