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Bareilly News: स्टेशन मास्टर के दफ्तर में पड़ी डकैती में 12 साल बाद चार को उम्रकैद

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बरेली। दबतरा रेलवे स्टेशन पर स्टेशन मास्टर के दफ्तर में 12 साल पहले पड़ी करीब 57 हजार रुपये की डकैती में फास्ट ट्रैक कोर्ट के अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम रवि कुमार दिवाकर ने चार दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। चारों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। वारदात को हथियारबंद छह बदमाशों ने अंजाम दिया था। इनमें से एक की मौत हो चुकी है, जबकि एक की गिरफ्तारी नहीं हो सकी थी। चारों दोषी बदायूं के रहने वाले हैं और अलग-अलग जिलों से हिस्ट्रीशीटर भी रहे हैं।
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दबतरा स्टेशन के तत्कालीन स्टेशन मास्टर खचेड़ू सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि 14 अक्तूबर 2012 की सुबह करीब 3:55 बजे वह ड्यूटी पर थे। इसी दौरान किसी के खटखटाने पर उन्होंने दरवाजा खोला तो तीन बदमाश तमंचे के साथ अंदर घुस आए। तीन दरवाजे के पास ही खड़े रहे। अंदर आए एक बदमाश ने गला दबाकर तमंचा उनकी कनपटी पर रख दिया। वहीं, दूसरे ने टोपो (टोपो पोर्टर) संजय कुमार को पकड़ लिया और तीसरे ने दरवाजा बंद कर लिया। इसके बाद धमकी देते हुए अलमारी की चाबी मांगने लगे। मना करने पर बाहर खड़े तीनों बदमाशों को भी अंदर बुलाकर चाबी खोजने लगे। इसके बाद टिकट ट्यूब का ताला तोड़कर चाबी निकाल ली। अलमारी खोलकर 56865 रुपये और टिकट ट्यूब से 310 रुपये निकाल लिए। संजय कुमार ने विरोध किया, तो एक बदमाश ने नाक व सिर पर तमंचे की बट मारकर घायल कर दिया। दूसरे बदमाश ने जान से मारने की नीयत से गोली चलाई, तो संजय ने हाथ मारकर तमंचा किनारे कर दिया और गोली पास में रखी केतली में छेद करते हुए निकल गई। इसके बाद सभी बदमाश फरार हो गए।
ऐसे पकड़ में आए बदमाश : एक बदमाश का नकाब खुला, स्टेशन मास्टर ने पहचान लिया
तत्कालीन स्टेशन मास्टर खचेड़ू सिंह ने बताया था कि सभी छह बदमाशों ने अपने चेहरे नकाब से ढंक रखे थे। भागते समय एक का नकाब हट गया। उस बदमाश को वह पहचानते थे। उसका नाम दीमक ऊर्फ दीमका ऊर्फ नजारिक खां था। इसके बाद पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर दीमक को पकड़ा। उसकी निशानदेही पर बाकी चार बदमाशों को भी पकड़ लिया। एक बदमाश की गिरफ्तारी नहीं हो सकी थी। पुलिस ने 27 नवंबर 2013 को कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल कर दिए। सुनवाई के दौरान वर्ष 2016 में दीमका की मौत हो गई। न्यायालय के समक्ष कुल 40 साक्ष्य और आठ गवाह पेश किए गए। इनके आधार पर कोर्ट ने चारों दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है।
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इनको हुई सजा
बदायूं निवासी शादाब, आशिक अली, इजहार और निसार अहमद।

तीन बदमाशों का आपराधिक इतिहास लंबा
शादाब, आशिक और निसार का दूसरे जिलों में भी आपराधिक इतिहास रहा है। तीनों का नाम बरेली, बदायूं और संभल के विभिन्न थानों में हिस्ट्रीशीटर की सूची में दर्ज है।
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संवाद
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