बरेली। जिलाधिकारी न्यायालय ने आपराधिक प्रवृत्ति के छह लोगों के शस्त्र लाइसेंस निरस्त कर दिए हैं। अब संबंधित के शस्त्र जमा कराने की जिम्मेदारी थाना पुलिस की है। हालांकि, ऐसे मामलों में लाइसेंस निरस्त करने की सिफारिश भेजने से पहले ही पुलिस संबंधित व्यक्ति का असलहा जमा करा लेती है।
सुभाषनगर के भूवेंद्र पाल सिंह का रिवॉल्वर किसी अन्य के हाथ में था और वह शस्त्र प्रदर्शन कर रहा था। इसका वीडियो सोशल वायरल होने पर पुलिस ने लाइसेंस निरस्त करने की सिफारिश की थी। डीएम कोर्ट में यह मामला तीन साल तक चला। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने भूवेंद्र पाल के शस्त्र लाइसेंस को निरस्त कर दिया।
आपराधिक प्रवृत्ति वाले बिथरी चैनपुर निवासी शाने अली, रवींद्र सिंह, फरीदपुर के शराफत व शाही के बख्तावर अली की बंदूक का लाइसेंस भी निरस्त कर दिया गया। फरीदपुर के ही आरेंद्र सिंह के रिवाॅल्वर के लाइसेंस को भी डीएम कोर्ट ने निरस्त कर दिया है। इसमें कुछ लोगों ने मंडलायुक्त कोर्ट में अपील की तैयारी भी शुरू कर दी है।
गार्ड ने तान दी थी बंदूक, चार महीने जमा रही
फरीदपुर निवासी चंद्रहास पांडेय सिक्योरिटी गार्ड हैं। एक व्यक्ति ने उनके विरुद्ध छोटी बात पर बंदूक तानकर जान से मारने की धमकी देने की शिकायत की थी। 21 नवंबर 2024 को यह मामला डीएम के कोर्ट में दायर हुआ था। कोर्ट ने दो लाख रुपये का बंध पत्र जमा करवाकर बंदूक रखने की इजाजत दी है। इस दौरान चार माह तक चंद्रहास की बंदूक जमा रही। संवाद