बरेली। एलईडी लाइट खरीद में घपले की आहट का खुलासा होते ही नगर निगम में हड़कंप मच गया। लाइट खरीद की डील करने आए प्रतिनिधि दूसरे दिन दिखाई नहीं दिए। गांधी उद्यान में दो-दो लाइटें ट्रायल के तौर पर भी नहीं लगाई गईं। अंदरखाने एलईडी लाइट के टेंडर निरस्त करने की बात भी चलने लगी है। लाइट खरीद के टेंडर दोबारा कराए जा सकते हैं।
नगर निगम में मंगलवार को मुंबई, दिल्ली, गाजियाबाद और बरेली की आठ कंपनियों के प्रतिनिधि एलईडी लाइट की डील करने आए थे। नगर निगम ने पहले चरण में एक करोड़ की एलईडी लाइटें खरीदने के लिए रेट की जानकारी की तो पता चला कि इनकी स्ट्रीट लाइटों के रेट बाजार के फुटकर भाव से कई गुना अधिक हैं। सौ वाट की स्ट्रीट लाइट की कीमत 50 हजार तक बताई गई थी। अमर उजाला ने ये मामला प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसके बाद नगर निगम के प्रकाश विभाग में हड़कंप मच गया। कंपनी प्रतिनिधि दोबारा लाइटें दिखाने नहीं आए, न ही गांधी उद्यान में दो स्ट्रीट बल्ब लगाकर ट्रायल कराया गया। सूत्रों के मुताबिक लाइट खरीद में कमीशन के खेल के खुलासे के बाद नगर निगम आमंत्रित टेंडरों को निरस्त करने पर विचार कर रहा है। बताया जाता है कि पुराने टेंडर निरस्त कर एलईडी लाइट के नए टेंडर निकाले जा सकते हैं। नगर आयुक्त शीलधर सिंह यादव के शहर से बाहर होने की वजह से लाइट खरीद पर कोई निर्णय नहीं हो पाया।