पुलिस के मुताबिक, पहले योगेश की मां फिर उसके पिता का निधन हो गया था। इसके बाद बुआ की देखरेख में योगेश अपने भाई बहनों के साथ जीवन यापन करने लगा। परिवार का खर्च चलाने के लिए वह बाइक की दुकान में काम करने लगा। इसी दौरान वह चोरियां भी करने लगा। जब इस बात की जानकारी दुकान मालिक को हुई तो उसने योगेश को हटा दिया था।
इसके बाद उसने रुपये की जरूरत पूरी करने के लिए वर्ष 2014 में पहली हत्या की। उस समय योगेश किशोर था। जब दस साल पहले उसने पूरे परिवार के साथ बदायूं शहर को छोड़ा तो अधिकांश लोग उसे भूल गए थे, लेकिन अब उसका नाम बिश्नोई गिरोह से जुड़ा तो एक बार फिर से वह चर्चा में आ गया। फिलहाल वह मथुरा जेल में बंद है।