बरेली में कई माह से सड़क किनारे बैठकर भीख रहे लटूरी और फूलवती इस बार वृद्ध आश्रम में दिवाली मनाएंगे। दोनों एक दूसरे के लिए अंजान हैं लेकिन अक्सर उनकी भीख मांगने के दौरान मुलाकात होती थी। जब शरीर थक गया तो दोनों एक साथ भीख मांगने लगे थे। हालत यह हो गई कि वह चलफिर भी नहीं पाते हैं।
शुक्रवार सुबह कुछ समाजसेवियों ने उन्हें किला पुल के नीचे भीख मांगते हुए देखा था। उन्होंने वृद्धा फूलवती और लटूरी के बारे में डीएम रविंद्र कुमार को जानकारी दी। डीएम के आदेश पर समाज कल्याण अधिकारी सुधांशु शेखर ने टीम भेजकर वृद्ध महिला पुरुष को किला पुल के नीचे से बुखार मोड़ पर स्थित वृद्ध आश्रम भिजवा दिया।
छपरा की रहने वाली हैं फूलवती
फूलवती खुद को बिहार के छपरा जिले की रहने वाली बताती हैं। वह कई साल पहले यहां बरेली आ गई थीं। तब से भीख मांगकर गुजारा कर रही थीं। फूलवती चलने फिरने में असमर्थ हैं। लटूरी बरेली में फरीदपुर के रहने वाले हैं। उनके भी परिवार में कोई सदस्य नहीं है। उनकी करीब 70-80 साल उम्र है।
लटूरी को आंखों से दिखना बंद हो गया है। अब तक फूलवती ही उनका सहारा बनी हुई थीं लेकिन अब वृद्ध आश्रम में उन्हें कई साथी मिल गए। अब कम से कम उन्हें भीख मांगना नहीं पड़ेगी। समय पर भोजन और कपड़े मिलेंगे। रहने को आश्रम मिलेगा। यहां आने के बाद से दोनों लटूरी और फूलवती काफी खुश हैं।