नवाबगंज जमीन घोटाले में निलंबित चल रहे चकबंदी अहलमद रमोद सक्सेना ने खुद को बेकसूर बताते हुए शासन में इसकी शिकायत की थी। इस पर चकबंदी आयुक्त ने इस मामले की जांच कराकर रिपोर्ट देने के आदेश दिए थे, लेकिन प्रशासन ने इस प्रकरण की जांच रिपोर्ट ही तैयार नहीं की है। इस पर चकबंदी आयुक्त ने डीएम को फिर से चिट्ठी भेजी है। इस घोटाले में अभी अहलमद सहित चकबंदी के दो कर्मचारियों को ही सस्पेंड किया गया है। जबकि चार अन्य सरकारी कर्मचारियों पर विभागीय कार्रवाई अब तक नहीं हुई है।
नवाबगंज के डंडिया नजमुल निशा में सौ बीघा जमीन की खतौनियों में फर्जीवाड़ा करके दूसरे के नाम की इंट्री दर्ज कराने के मामले में चकबंदी के अहलमद रमोद सक्सेना को सस्पेंड किया जा चुका है। इस कार्रवाई के बाद रमोद ने शासन को यह शिकायत भेजी थी बरेली में उसकी तैनाती वर्ष 2017 की है, जबकि यह प्रकरण उससे पहले का है। इसके बावजूद उन्हें इस मामले में मुख्य आरोपी बना दिया गया है।
शिकायत में उन्होंने पूर्व में तैनात रहे एडीएम सिटी ओपी वर्मा सहित कई कर्मचारियों की भूमिका पर ही सवाल खड़े किए थे। शासन तक यह मामला पहुंचने के बाद चकबंदी आयुक्त ने डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह ने अहमलद की शिकायत की जांच करने को कहा था, लेकिन अब इसकी रिपोर्ट शासन में नहीं पहुंची है। इस पर चकबंदी आयुक्त ने फिर से डीएम को लेटर जारी कर जांच रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं।