ट्रांसपोर्टर विजय के पंप का कर्मचारी अंकिश भी सरगना
ट्रांसपोर्टर व पेट्रोल पंप समेत कई प्रतिष्ठानों का मालिक बताया जा रहा विजय अग्रवाल भी लेखपाल गिरोह के मुकदमों में नामजद होने के बाद से लापता हो गया है। सूत्रों के मुताबिक विजय अग्रवाल ही गिरोह का सरगना है। लेखपाल के साथ अधिकतर मुकदमों में नामजद अंकिश त्रिपाठी विजय का मोहरा बताया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक वह काफी समय तक विजय के पेट्रोल पंप पर कर्मचारी रहा था। इस नाते उसके जमीन विवाद संबंधी मामलों को विजय अग्रवाल फाइनेंस करता था।
सावन पर रुपया लगाने वाले शहर छोड़कर भागे
एसआईटी गठित होते ही सावन के इशारे पर लाखों-करोड़ों रुपये लगाने वाले फाइनेंसर शहर छोड़कर भाग गए हैं। पुलिस विजय अग्रवाल, अंकिश त्रिपाठी और अक्षित सिंह समेत उन 21 लोगों की लोकेशन तलाश रही है जो कैंट थाने में दर्ज कराए गए मुकदमे में नामजद हैं। सूत्रों के मुताबिक सावन के करीबियों में से कुछ लखनऊ के सफेदपोशों की शरण में पहुंच गए हैं।
एसआईटी नामजद लोगों की संपत्तियों की पड़ताल कर रही है। पुलिस की कार्रवाई देखकर ऐसे लोग भी गायब हो गए हैं, जिनका नाम अभी मुकदमों में नहीं जुड़ा है लेकिन वह सावन के करीबी हैं। इसमें से एक किला क्षेत्र का कारोबारी भी हैं, उसका नाम अक्सर जमीन संबंधी विवादों में आता रहता है।
एसपी सिटी मानुष पारीक ने बताया कि लेखपाल मामले में नए मुकदमे दर्ज होने के साथ आरोपियों की संख्या बढ़ रही है। कुछ लोग काफी रसूखदार भी बताए जा रहे हैं। आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा। उनकी संपत्ति की भी जांच की जाएगी।