सीडीओ की अध्यक्षता वाली समिति ने बृहस्पतिवार को भी परिसंपत्तियों का मूल्यांकन कराया। अभियंता सरनिया और गरगईया में पहुंचे। जांच और मूल्यांकन के बाद अभियंता रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। प्रारंभिक रिपोर्ट जल्दी ही वरिष्ठ अफसरों को सौंपी जाएगी।
विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी आशीष कुमार ने बताया कि परिसंपत्तियों का मूल्यांकन एनएचएआई की ओर से नियुक्त मूल्यांकनकर्ता और पीडब्ल्यूडी के अभियंता करते हैं। अभी मूल्यांकन रिपोर्ट नहीं आई है। जांच टीम में शामिल अभियंता ही बता सकते हैं कि वहां मूल्यांकन की क्या स्थिति है।
अभियंताओं-कर्मचारियों पर कार्रवाई की तलवार
ज्वाइंट मेजरमेंट सर्वे से लेकर परिसंपत्तियों का मूल्यांकन फाइनल होने तक प्रक्रिया में शामिल कर्मचारियों, निजी एजेंसी के सर्वेयर और मूल्यांकनकर्ताओं के साथ-साथ लेखपाल और कुछ अन्य कर्मचारियों की भूमिका रहती है। इनकी मूल्यांकन रिपोर्ट को पीडब्ल्यूडी के अभियंता सत्यापित करते हैं। इसलिए तत्कालीन अभियंताओं और कर्मचारियों पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है।
जांच टीम अब उन कर्मचारियों और अभियंताओं के नाम भी तलाश रही है, जिनके हस्ताक्षर उस मूल्यांकन रिपोर्ट पर हैं, जिसमें मुआवजा तय किया गया। कितना मूल्यांकन बन रहा था और कितना बना दिया गया, इसका उल्लेख जांच रिपोर्ट में किया जाना है। शासन ने स्पष्ट रिपोर्ट मांगी है। मंडलायुक्त की ओर से जब यह रिपोर्ट शासन को पहुंचेगी तो संबंधित विभागाध्यक्षों को दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए जाएंगे।
एनएचएआई की ओर से जिस निजी एजेंसी को सर्वे और मूल्यांकन कराने के बाद मुआवजे का प्रस्ताव तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी, मुख्यालय की ओर से उसके खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति पहले ही की जा चुकी है। इस मामले में कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ने पर बरेली, पीलीभीत और ऊधमसिंह नगर जिले के तत्कालीन कर्मचारी और अभियंता फंस सकते हैं।