बरेली। खानकाह नियाजिया में बुधवार को शाम ढलते ही मन्नतों के चिराग जगमगा उठे थे। चिरागों से फैलती रोशनी से हर दरो दीवार सोने सी चमक रही थी। इस नूरानी माहौल में बड़ी संख्या में लोग दुआ में हाथ उठाए थरथराते लबों से मन्नतें मांगते दिखे।
यहां वो तमाम अकीदतमंद थे जो साल भर इस मुबारक मौके के इंतजार में रहते हैं। बड़ी संख्या में लोग पहली बार भी पहुंचे। दूर दराज शहरों से लोग जश्न-ए-चिरागां में शामिल होने के लिए दो दिन पहले से ही खानकाह नियाजिया में पहुंचना शुरू हो गए थे। इसमें हर मजहब व मिल्लत के लोग शामिल नजर आए।
दूसरे दिन भी बड़ी संख्या में महिलाएं मौजूद रहीं। तमाम लोग कतार में अपनी बारी आने के इंतजार में खानकाह के बाहर तक खड़े थे। यहां खानकाह की तरफ से लोगों को शर्बत तकसीम होता रहा। मेडिकल कैंप पर बीमारों का उपचार चलता रहा।
खानकाह के बानी कुतुबे आलम हजरत शाह नियाज अहमद का कायम ढाई सौ वर्ष पुराना यह जश्न दस्तूर के मुताबिक सुबह कुरान ख्वानी से शुरू हुआ। दिन भर हाजिरी और चादरपोशी के बाद शाम को साहिबे सज्जादा आल्हाज शाह मेहंदी मियां नियाजी ने खानकाह के आंगन में पहला चिराग रोशन किया।
इसके बाद लोगों को चिराग बांटने का सिलसिला देर रात तक चलता रहा। इस जश्न में शामिल होने कांग्रेस के निवर्तमान महानगर अध्यक्ष दिनेश दद्दा, कांग्रेस नेता डाॅ. हरीश गंगवार, भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के शानू काजमी सहित अन्य पार्टियों के नेता भी देर रात पहुंचे।
अदा की गई महबूबीन के कुल की रस्म
जश्न-ए-चिरागां के मौके पर रात में कव्वाली की महफिल सजाई गई। महफिल के बाद देर रात गौसुल आजम हजरत शेख अब्दुल कादिर जिलानी व महबूबे इलाही हजरत निजामुद्दीन औलिया के कुल शरीफ की रस्म अदा की गई। आखिर में साहिबे सज्जादा ने अमन-ए-आलम, अपने मुल्क, कौम व जायरीन के लिए दुआएं की। जशन-ए-चिरागां की सारी व्यवस्थाएं प्रबंधक जुनैदी मियां नियाजी की देखरेख में पूरी हुईं। मौलाना कासिम नियाजी का विशेष सहयोग रहा।