मऊ जनपद निवासी लालजी ने पुलिस पूछताछ में बताया कि वर्ष 2008 में उसको ब्रेन ट्यूमर हुआ था। वह अपना उपचार कराने के लिए दिल्ली के सफदरगंज अस्पताल में भर्ती हुआ। वहां डॉक्टर ने उसे बताया कि ब्रेन ट्यूमर की वजह से उसकी जान भी जा सकती है। उसने बताया कि डॉक्टर ईसाई धर्म के थे। उन्होंने उसके स्वास्थ्य के लिए प्रभु ईसा मसीह से काफी प्रार्थना की। इसके बाद वह ठीक हो गया। जिसके बाद उसने अंधविश्वास में फंसकर हिंदू धर्म छोड़कर ईसाई धर्म अपना लिया।
उसके बाद से लालजी लगातार हिंदू बस्ती में रहकर गरीब लोगों को ईसाई धर्म का प्रवचन देकर उन्हें ईसाई बनाकर धर्म से जोड़ रहा था। गरीब लोगों को नौकरी व धर्म का प्रलोभन भी देता था। उसकी बातों में फंसकर भोले-भाले लोग धर्म परिवर्तन कर लेते थे। वह प्रत्येक रविवार को फरीदपुर के मोहल्ला फर्रखपुर में किराये के मकान में गरीब लोगों को इकट्ठा कर धर्म परिवर्तन के लिए उकसाता था।
कई परिवारों का धर्मांतरण कराने का अंदेशा
लालजी पिछले पांच वर्षों से फरीदपुर नगर के मोहल्ला फर्रखपुर में किराए के मकान में रहकर हिंदू परिवारों को नौकरी और रुपयों का प्रलोभन देखकर ईसाई धर्म अपनाने के लिए उकसा रहा था। किराए के मकान में वह हर रविवार को प्रार्थना सभा करता था। जिसमें हिंदू परिवारों को बुलाकर उन्हें धर्मांतरण करने के लिए समझाता था। आरोपी से पूछताछ करने के बाद पुलिस को अंदेशा है कि उसने कई परिवारों का धर्मांतरण करा दिया है। पुलिस इस मामले की जांच कर रही है।
यह बोले जिम्मेदार
फरीदपुर इंस्पेक्टर राधेश्याम ने बताया कि आरोपी को जेल भेजा गया है। उसने विगत पांच वर्षों में हजारों परिवारों को सत्संग में बुलाकर उन्हें धर्मांतरण करने के लिए उकसाया। जिससे यह भी अंदेशा है कि उसने कई परिवारों का धर्मांतरण करा दिया होगा, इसकी भी जांच की जा रही है।