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Bareilly News: गर्भावस्था में नियमित जांच का अभाव भी डाउन सिंड्रोम की वजह

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बरेली। शिशु का चेहरा थोड़ा चपटा, आंखें तिरछी, हाथ में एक या दो लकीरें या जीभ सामान्य से लंबी हो तो ये डाउन सिंड्राेम के लक्षण हो सकते हैं। यह आनुवांशिक रोग है। गर्भावस्था में नियमित जांच का अभाव इस रोग की वजह हो सकती है। इसका स्थायी इलाज नहीं है।
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जिला अस्पताल मनकक्ष के मनोचिकित्सक डॉ. आशीष कुमार के मुताबिक, डाउन सिंड्रोम एक ऐसी स्थिति है, जिसमें बच्चे के शरीर में 21वें क्रोमोसोम की एक अतिरिक्त कॉपी होती है। इसको ट्राइसॉमी-21 कहते हैं। इसी से शारीरिक और मानसिक विकास प्रभावित होता है। सीखने की क्षमता धीमी होती है और शारीरिक विकास सामान्य बच्चों से अलग होता है।
उन्होंने बताया कि देरी से हो रहे विवाह की वजह से 35 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को गर्भधारण पर अधिक ध्यान देना चाहिए। देर से शादी और गर्भधारण, नियमित जांच न कराना डाउन सिंड्रोम की अहम वजहें हैं।
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इलाज के लिए पहुंच रहे ज्यादातर बच्चों की आयु चार वर्ष या इससे अधिक होती है। लक्षण पहचान में आने पर थेरेपी की जाती है। डाउन सिंड्रोम कोई बीमारी नहीं है लेकिन जीवनभर बनी रहने वाली स्थिति है। 700 जन्मे शिशु में एक बच्चा इस सिंड्रोम से ग्रसित हो सकता है। ब्यूरो
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