मितौली। सीएचसी मितौली डाॅक्टरों की कमी से जूझ रही है। करीब 2.5 लाख की क्षेत्रीय आबादी के इलाज की जिम्मेदारी निभाने वाली सीएचसी केवल दो डॉक्टरों के सहारे चल रही है। यहां प्रत्येक कार्य दिवस में करीब 400 से 500 मरीजों की ओपीडी होती है। गंभीर मरीजों को 35 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय जाना पड़ता है।
सीएचसी मितौली में अधीक्षक के अलावा एक महिला डॉक्टर है। इनके अलावा सीएचसी में फिजिशियन, रेडियोलॉजिस्ट, जनरल सर्जन, बाल रोग विशेषज्ञ, हड्डी रोग विशेषज्ञ, स्त्री रोग विशेषज्ञ, पैथोलॉजिस्ट और महिला सफाई कर्मचारी नहीं है। ऐसे में दूर-दराज से आने वाले मरीजों का कैसे इलाज होता होगा, इस बात का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। अगर सीएचसी अधीक्षक को कहीं जाना होता है तो पीएचसी में तैनात डॉक्टरों को बुलवाकर ओपीडी करवाई जाती है।
सीएचसी क्षेत्र में कैमहरा, संडिलवा, चुरईपुरवा, कल्लुआमोती, ककरहा सहित पांच पीएचसी हैं। सभी में डॉक्टर सहित फार्मासिस्ट, वार्डबॉय, स्टाफ नर्सों की तैनाती है।
243 आशा व 52 एएनएम की है, तैनाती
मितौली सीएचसी क्षेत्र में 243 आशा बहुएं, 52 एएनएम की तैनाती है। इनके कार्य क्षेत्र बंटे हुए हैं। सभी आशा व एएनएम अपने-अपने क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं को लोगों तक पहुंचा रही हैं। क्षेत्र में 25 आरोग्य मंदिर बनाए गए हैं। सभी में स्वास्थ्य अधिकारी मौजूद हैं।
अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं
सीएचसी में अभी जल्द ही पब्लिक हेल्थ यूनिट का शुभारंभ किया गया है। इसमें आने वाले मरीजों को तमाम प्रकार की जांचों सहित एक्स रे करवाने की सुविधा दी जा रही है। हालांकि यहां पर अभी तक अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं है। लंबे समय से उसकी मांग की जा रही है। अल्ट्रासाउंड के लिए मरीजों व तीमारदारों को बाहर जाना पड़ता है।
सीमित संसाधनों व डॉक्टरों की कमी के बावजूद मरीजों को बेहतर चिकित्सा सेवा दी जा रही है। डॉक्टरों की कमी को लेकर लगातार उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जा रहा है। शासन स्तर से डॉक्टर आ सकते हैं। व्यवस्थाओं को पहले की तुलना में व्यवस्थित किया गया, ताकि लोगों को सही इलाज मिल सके। - डॉ. देवेंद्र सिंह, सीएचसी अधीक्षक, मितौली