राम पर सवाल उठाने वालों को आड़े हाथों लिया
राम और रामचरित मानस पर सवाल उठाने वालों को आड़े हाथ लेते हुए कुमार विश्वास ने कहा कि राम पर सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा चला। बीच में रामनवमी पड़ गई तो कोर्ट में छुट्टी हो गई। मैं पूछता हूं कि राम नहीं हैं तो रामनवमी पर छुट्टी क्यों हुई।
उन्होंने कहा कि राम पर पहली बार शंका-संशय नहीं है। ऐसे अनेक प्रसंग आए। इंद्र के बेटे जयंत ने भी संशय किया था। इंद्र ने समझाया, लेकिन बालक नहीं माना। कौए का रूप धरा और देवी सीता के पैर में नोच लिया। तब राम ने एक तिनका उसकी ओर फेंका। जयंत आगे-आगे और तिनका पीछे-पीछे। तीनों लोक में जयंत घूमा, लेकिन कहीं आश्रय नहीं मिला। तब वह नारद की शरण में पहुंचा।
नारद ने कहा कि राम की शरण में जाने से ही मुक्ति मिलेगी। जयंत ने राम से अनुनय-विनय की। राम ने कहा- प्राण दान तो दे रहा हूं, पर एक आंख नहीं होगी। उसके बाद से ही कौए की दो आंखों में से सिर्फ एक में ही पुतली होती है। इस कथा प्रसंग के जरिये उन्होंने सत्ता के अंहकार चूर रहने वाले लोगों के पुत्रों के व्यवहार और आचरण का उल्लेख किया। बार-बार बोले- इंद्र के बेटे किसी की नहीं सुनते। राम और रामचरित मानस पर सवाल उठाने वाले भी जब मरेंगे तो उनके पीछे भी राम नाम सत्य है... की गूंज सुनाई देगी।