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गेहूं निर्यातक हताश, विदेशों से सौदे टूटे

Sat, 11 Apr 2015 02:01 AM IST
बरेली
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बेमौसम बारिश से खराब हुए गेहूं के चलते विदेशों से सौदे नहीं मिल रहे हैं। इससे बरेली मंडल से गेहूं निर्यात करने वाले कारोबारी बेहाल हैं। इस मंडल से हर सीजन में तीस लाख टन से ज्यादा गेहूं की खरीद होती रही है। बरेली मंडल और आसपास जिलों में होने वाली गेहूं उपज की गुणवत्ता भी अच्ची  मानी जाती है।  मंडल से खरीदा गया गेहूं मध्य एशिया, खाड़ी देश और आसपास देशों में निर्यात होता रहा है। उनके अलावा मल्टी नेशनल और निजी कंपनियां भी बड़े पैमाने पर गेहूं खरीद करती हैं। इस सीजन में कंपनियों ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं। खरीददारों को कहना है कि इस भीगे गूहूं को भंडारित नहीं किया जा सकता है।
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भारतीय नामीगिरामी फ्लोर मिलें और गेहूं से अन्य उत्पाद बनाने वाली कंपनियों ने अपनी मांग पूरी करने के लिए आस्ट्रेलिया से गेहूं आयात शुरू कर दिया है। बता दें, आस्ट्रेलियाई गेहूं पूरी दुनिया में नंबर वन माना जाता है। दूसरे नंबर पर भारत है। यूक्रेन, ब्राजील 180-185 डालर प्रति कुंतल गेहूं बिक्री कर रहे हैं। इन दोनों देशों से गेहूं आयात करने पर सभी खर्चे जोड़कर कीमत 1365 रुपये प्रति कुंतल आ रही है। जबकि आस्ट्रेलिया से अच्छा गेहूं मंगाने पर 1700 रुपये प्रति कुंतल लागत आ रही है। खरीद सौदे करने शुरू कर दिए हैं।  दक्षिण भारत स्थित दर्जनों प्रमुख फ्लोर कंपनियाें ने आस्ट्रेलिया से गेहूं सौदे किए हैं। बताया जाता है कि विदेशों से आना वाला गेहूं जून माह तक पहुंचेगा।
इधर निर्यातक गेहूं पिछैती फसल से आस लगाए बैठे हैं। कारोबारियों को मानना है कि अगर मौसम ने साथ दिया तो दो सप्ताह बाद आने वाला गेहूं अच्छा होगा। प्रमुख कारोबारी मुख्तार मंसूरी बताते हैं कि  विदेशों से चावल पिछले वर्ष से ही ठप है इस सीजन में रही कसर गेहूं ने पूरी कर दी है।
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इन्फो
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गेहूं कारोबार में प्रमुख कंपनियां
आईटीसी, ओलाम एक्सपोर्ट, लुईस डैफर्स, कारगिल, ग्लैनकोर आदि


बरेली मंडल में कारोबार
30 लाख टन प्रति सीजन

सरकारी खरीद लक्ष्य/ कीमत
4.20 टन और 1450 प्रति कुंतल
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फोटो सहित

बारिश से गुणवत्ता प्रभावित हो गयी है। पिछैती गेहूं और बारिश से अप्रभावित जिलों से कुछ उम्मीदें जरूर है। गेहूं पर मौसम की मार से किसान और व्यापारी दोनों ही बेहाल हैं। मौजूदा गेहूं भंडारित नहीं किया जा सकता है, इससे विदेशी सौदे नहीं मिल रहे हैं। अगर सरकार ने निर्यातकों को सब्सिडी दे तो कुछ सौदे बहाल हो सकते हैं।  गेहूं उत्पादन में अग्रणी देशों में भाव काफी कम हैं। - राजू खंडेलवाल, प्रमुख खाद्यान्न निर्यातएक
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