बेमौसम बारिश ने किसान को कहीं का नहीं छोड़ा है। फसल बर्बाद हो गई है। कर्ज में डूबे किसान का अर्थशास्त्र गड़बड़ा गया है। बटाई या फिर ठेके पर खेती करने वाला हो, छोटे हो या मझला हर किसान के सामने आर्थिक संकट गहराने लगा है। जो गेहूं नष्ट होने से बच भी गया है, उसे खरीदने के लिए कोई तैयार नहीं है। ऐसे में किसान को कर्ज की अदायगी और घर चलाना मुश्किल हो रहा है।
18 बीघा जमीन की मालिकिन का बिगड़ा घर
आंवला के भमौरा के गांव खेडा की रहने वाली 18 बीघा जमीन की मालिकिन किसान रामदेई का कहना है कि गेहूं की फसल के बल पर ही पंजाब नेशनल बैंक की देवचरा शाखा से क्रेडिट कार्ड पर एक लाख पचपन हजार रुपये का कर्ज लिया था। पूरी रकम खेत में लगा दी, उम्मीद थी कि अच्छी फसल होगी। गेहूं बेचकर कर्जा अदा करने के बाद बची हुई मुनाफे की रकम से घर के और कामकाज करा लूंगी। तीन बेटों के परिवार इसी खेती पर निर्भर थे। बेमौसम बारिश से खेत तबाह हो गए और ऐसे में बेटों के परिवारों को चलाना भी मुश्किल हो गया है। जबकि प्रशासन ने मुआवजे के लिए 8600 रुपये निर्धारित किए हैं, यह तो खेत में बोए गए बीज की रकम भी नहीं है।
गिरवीं रखे पत्नी के जेवरात कैसे छूटेंगे
बहेड़ी तहसील के सराय गांव में बटाई पर जमीन लेकर वर्षाें से खेती करते चले आ रहे हे किसानों की आंखें बेमौसम बारिश ने भर आईं हैं। इनके गांव में लेखपाल सर्वे के लिए नहीं पहुंचा है। यहां के खेमकरन बताते हैं कि इस बार तीन बीघा जमीन बटाई पर लेकर गेहूं की फसल बोई। शुरुआत में अच्छी फसल थी तो एक सराफ के पास पत्नी के जेवर गिरवी रखकर करीब बीस हजार रुपये खेती में लगा दिए लेकिन वर्षा और आंधी ने उन्हें बर्बाद कर दिया। खेत मालिक को एक कुंतल बीघा के हिसाब से गेहूं देना था। वह इसे कैसे पूरा कर पाएंगे इसकी चिंता में घुले जा रहे हैं। सराफ के पास गिरवी पड़े जेवरात भी अब नहीं छुड़वा पाएंगे। खेत का मालिकाना हक न होने के कारण मुट्ठीभर मदद भी नहीं मिलेगी। मुआवजा तो खेत मालिक के पास पहुंच जाएगा। खेमकरन का कहना है कि सरकार से उन्हें तो किसी तरह की मदद मिलने से रही। वह कहते हैं कि भइया कुछ ऐसा करो कि हम लोगों के आंसू भी पुंछ जाएं।
खेत मालिक को तो बटाई की रकम चाहिए
शेरगढ़ ब्लाक के किसान अनोखे लाल कहना है कि पांच बीघा गेहूं बटाई पर जमीन लेकर बोया था। पूरा खेत बर्बाद हो गया। इन हालातों में अब क्या करें। सरकार से जो भी मुआवजा मिलेगा वो उनके खेत मालिक को मिलेगा। खेत मालिक का कहना है, इससे मुझे क्या मतलब। उनका एक कुंतल बीघा तय है वो तो लेकर रहेगा। अब अनोखे एसडीएम दफ्तर के चक्कर लगाते-लगाते परेशान है। वह प्रशासन से यह फरियाद कर रहा है कि बटाई पर खेती करने वालों को सरकारी इमदाद दिलवाएं।
शेर सिंह बोला, कर्ज नहीं दे पाऊंगा कुछ भी करो
ग्राम नवदिया देहा जब्ती निवासी शेर सिंह ने करीब चार साल पहले अपनी बेटी की शादी में पांच बीघा भूमि पर साठ हजार रुपये कर्जा लिया था। शेर सिंह उस कर्ज को नहीं चुका पाया तो उसने पांच में से तीन बीघा की मिट्टी एक लाख रुपये में भट्ठा स्वामी को बेच दी और पचास हजार रुपये ग्रामीण बैंक में जमा करवा दिए। बैंक अधिकारियों ने बताया कि अस्सी हजार रुपये और जमा करने हैं तो शेर सिंह की पैराें तले की जमीन खिसक गई। पहले से परेशान शेर सिंह का तीन बीघा खाली खेत पड़ा है और दो बीघा में गेहूं की फसल इस बरसात में तबाह हो गई। परेशान शेर सिंह ने बैंक अधिकारियोें से झुंझला कर कह दिया कि कर्ज नहीं दे पाऊंगा। विक लांग हूं, मुझे चाहे जहां ले जाओ। सर्वे का सच उगलते हुए शेर सिंह ने बताया कि गरीबों का काहे का सर्वे अमीरों के अनुसार ही लेखपाल ने सर्वे किया है। इसलिए कुछ मुआवजा मिल जाए तो काफी है। कम से कम रोजी रोटी के लाले तो नहीं पडे़ंगे।