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रुहेले किसान इतने हताश कभी न थे

Tue, 07 Apr 2015 01:19 AM IST
बरेली
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आपदाएं पहले भी आयी लेकिन रुहेलखंड में इतनी हताशा पहले कभी नहीं देखी गई। दो बार के आंधी-ओलों से किसानों का हौसला इस कदर तोड़ दिया कि कोई आत्महत्या कर रहा है तो कोई खेत में ही खड़े-खड़े दम तोड़ रहा है। अकेले बरेली जिले में 20 मौतें हो चुकी हैं। पूरे रुहेलखंड में ये आंकड़ा सोमवार को 48 तक पहुंच चुका है। ज्यादातर मामलों में मरने वाले सीमांत और छोटे किसान हैं और लगभग सब पर बैंकों या सूदखोरों का कर्जा लदा है। मंडल में सोमवार तक 31 किसानों की मौत हो चुकी है। मुरादाबाद मंडल के रामपुर में 7, संभल में 6 और मुरादाबाद में भी 6 मौतें हुई हैं। बरेली में 20, बदायूं में छह, शाहजहांपुर में दो और पीलीभीत में तीन किसान बर्बाद फसल की भेंट चढ़ गए। पुराने अनुमान में क्षति का आकलन 25 से 50 फीसदी बताया गया था। दूसरी बारिश के बाद का सर्वे अभी पूरा नहीं हो पाया है। सोमवार को अमर उजाला ने कुछ गांवों का दौरा किया प्रस्तुत है ग्राउंड रिपोर्ट-
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(फोटो-06एमआरजेडपी से 06एमआरजेडपी4 तक: अन्नदाता किसान की बर्बादी की दास्तां बयां करतीं रास गांव की चंद तस्वीरें और 06एमआरजेडपी5- ग्राम प्रधान साधूराम मौर्य।)

शादियां टल गई पर कर्ज कैसे चुकाएं

मीरगंज। तहसील के 245 गांवों में मौसम की मार से किसान बेहाल हैं। अमर उजाला टीम सोमवार को ब्लाक शेरगढ़ के गांव रास पहुंची तो काश्तकारों का दर्द छलककर सामने आ गया। ज्यादातर की चिंता यही थी कि अब फसल बोने के लिए लिया कर्ज कैसे चुकाएंगे। कुछ को तो अपनी बेटी और बेटे की शादी तक टालनी पड़ गई है।
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जमील अहमद और उनकी बीवी अनीसा खेत में गेहूं की सड़ चुकी बालियों को मायूसी से निहार रहे थे। इनकी खुद की जमीन तो सिर्फ डेढ़ बीघा है। 15 बीघा जमीन ठेके पर लेकर गेहूं बोया था।  फसल के लिए मोटे ब्याज पर लिया गया 58 हजार रुपये का कर्ज सिर पर है।  कर्ज कैसे चुकाएंगे यही चिंता दिन-रात खाए जा रही है। जानी ने भी पांच बीघा निजी और नौ बीघा ठेके की जमीन पर गेहूं बोया था। इसके लिए 20 हजार रुपये में भैंस बेची और साहूकार से 80 हजार रुपये कर्ज  लिया था। सब कुछ मिट्टी में मिल चुका है।  रहीस अहमद पर बैंक ऑफ बड़ौदा, सहोड़ा का 53 हजार और नत्थूलाल पर इसी ब्रांच का 65 हजार रुपये कर्ज है। रहीस का बीस बीघा और नत्थूलाल क साढ़े सात बीघा  फसले बर्बाद हो चुकी है। पूरनलाल के बेटे की शादी 28 अप्रैल को  थी, 33 बीघा गेहूं सड़ जाने से मजबूरन उन्हें शादी फिलहाल टालनी पड़ गई है। माता प्रसाद का पांच एकड़ खेत में गेहूं  बर्बाद हो जाने से बैंक का 70 हजार रुपये और सहकारी समिति औरंगाबाद का 10 हजार रुपये कर्ज चुकाने की चुनौती सामने  है। लेखपाल अशोक कुमार ने भी 60-70 फीसदी गेहूं नष्ट होने की बात मानी है। हालांकि, अब तक सर्वे रिपोर्ट नहीं भेज पाए हैं। ग्राम प्रधान साधूराम मौैर्य तो 90 फीसदी तक गेहूं खेतों में ही नष्ट होने का दावा कर रहे हैं।
रामगंगा खादर में तातारपुर, कपूरपुर, समसपुर, सिमरिया, मदनापुर, रम्पुरा किसानान, गोरा लोकनाथपुर, हुरहुरी आदि गांवों में भी गेहूं, मसूर, लाही-सरसों के खेत को लगभग पूरी तरह बर्बाद कर दिया है। समसपुर के प्रधान आनंद मोहन वर्मा गुड्डू बताते हैं कि काश्तकारों का 1500 बीघा से ज्यादा गेहूं 80 फीसदी तक और तकरीबन 500 बीघा से ज्यादा मसूर की फसल तबाह हो गई है। समसपुर के नत्थूलाल वर्मा को 16 अप्रैल को अपनी बिटिया की शादी करनी थी। कार्यक्रम आगे खिसकाना पड़ गया। कृष्णपाल सिंह को भी 26 अप्रैल को निर्धारित बिटिया की शादी आगे खिसकानी पड़ी।

पी एच 02- बर्बाद फसल दिखाता किसनापुर के मदनलाल का बेटा।

ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रही मदद
नवाबगंज । गेहूं के साथ दलहन-तिलहन की फसलें चौपट हो गई हैं। शासन ने अब तक सिर्फ 21 लाख की मदद तहसील के लिए दी है। किसान इसे ऊंट के मुंह में जीरा कह रहे हैं। भदपुरा के गांव डबरा-डबरी, मुड़िया चौधरी, महमूदापुर, पनबड़िया, जलालपुर, किशनापुर, रुकुमपुर, गुलड़िया लेखराज व कमलापुर मेहराब अली के साथ ही नवाबगंज विकास क्षेत्र के बीजामऊ व ठिरिया में रबी की फसलें काफी हद तक चौपट हो चुकी हैं। डबरी के 178 किसानों को करीब 6 लाख 17 हजार, डबरा के 53 किसानों को 2 लाख 38 हजार, कमलापुर मेहराब खां के 40 किसानों को 1 लाख 41 हजार और बीजामऊ के 54 किसानों को 3 लाख 95 हजार की मदद दी गई है। राजस्व विभाग के मुताबिक, जिनकी फसलों को 50 फीसदी से अधिक नुकसान हुआ है, उनको राहत दी गई है। किशनापुर के मदन लाल के पास डेढ़ एकड़ भूमि है। उन्होंने आधी पर गेहूं बोया था जो पूरी तरह बर्बाद हो चुका है। इन्हें अब तक सरकारी मदद नहीं मिली है। महमूदापुर और मुड़िया चौधरी के किसानों को भी कोई मदद नहीं मिली है।

गुलड़िया भवानी में पचास एकड़ फसल गिरी
बहेड़ी। तहसील के गांव गुलड़िया भवानी में अब किसानों को कर्ज चुकाने और पेट पालने की चिंता खाए जा रही है। गांव में करीब दो सौ एकड़ गेहूं की फसल बोई गई थी। इसमें करीब पचास एकड़ फसल खेतों में गिर गई है। बालियां काली पड़कर बेकार हो चुकी हैं। तहसील प्रशासन ने सर्वे में महज चार किसानों को शामिल किया है। अनिल गंगवार कहते हैं कि बीस बीघा जमीन पर गेहूं की फसल बोई, लेकिन बारिश और तेज आंधी ने सब खत्म कर दिया  सरदार मंदीप सिंह ने पांच एकड़ जमीन पर गेहूं बोया था। तीन एकड़ में बाली काली पड़ गई है। बाकी फसल में भी दाना बहुत कम है। चौ. जसवीर सिंह की  बीस एकड़ गेहूं की फसल चौपट हो गई है। गन्ने का पैसा अब तक नहीं मिला है।

 किसान सर्वे से संतुष्ट नहीं
आंवला। सर्वे रिपोर्ट में तहसील क्षेत्र के सिरौली का गांव गुरुगांवा ऐतमाली के तीन मजरों गिरधरपुर, डालचंद गौंटिया और मोर सिंह गौंटिया में 162  किसानों को मदद का पात्र मानते हुए लेखपाल ने रिपोर्ट भेज दी है। बुद्धपाल बताते हैं कि उनकी भी नौ बीघा फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई। सुभाष, भीमसेन, रामदास और ओमकार सिंह बताते हैं कि किसी अधिकारी या कर्मचारी ने खेत पर जाना तो दूर घर आकर हाल तक नहीं लिया।
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