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जिले के चार और किसानों ने दम तोड़ा

Sun, 05 Apr 2015 02:00 AM IST
बरेली
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बर्बाद फसल के सदमे से किसानों की मौत का सिलसिला जारी है। शनिवार को मीरगंज, बिशारतगंज, हाफिजगंज और शीशगढ़ में चार और किसानों ने सदमे में दम तोड़ दिया। चारों पर बैंकों का कर्ज भी था।
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बिशारतगंज के कंधरपुर गांव के 45 साल के कृष्ण पाल ने डेढ़ बीघा जमीन में गेहूं की फसल बोई थी। वह शनिवार सुबह खेत में गए। घर लौटने पर बेचैनी की शिकायत की। घर वाले झोलाछाप को बुलाकर लाए तो उसने मृत घोषित कर दिया। कृष्ण पाल ने बेटी की शादी के लिए पिछले साल पिता के नाम से पूरी जमीन पर सेंट्रल बैंक आफ इंडिया की देवचरा शाखा से किसान क्रेडिट कार्ड बनवाकर साठ हजार का कर्जा लिया। साहूकार और कुछ अन्य लोगों का भी कर्ज था। उसके नाम कृषि भूमि नहीं है। जमीन पिता बेनी राम के नाम है इसलिए उसे परिवार मुखिया मृत्यु योजना के अलावा अन्य कोई लाभ नहीं मिल सकता।
शीशगढ़ के बल्ली गांव के हसनपुर मजरा में भी 53 वर्षीय किसान लालता प्रसाद की हार्टअटैक से मौत हो गई।  शुक्रवार को वह खेत पहुंचे तो गेहूं की बर्बादी देख सदमा लग गया। घर पहुंचने पर अचेत हो गए। घर वाले शीशगढ़ ले जा रहे थे मगर रास्ते में दम तोड़ दिया। बेटे नरेंद्र कुमार ने बताया कि उन्होंने बैंक ऑफ बड़ौदा से 33 हजार का लोन ले रखा था।
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हाफिजगंज में चुनुआ लावाखेड़ा गांव के 60 साल के डोरीलाल ने खेत से लौटने के बाद  घर में दम तोड़ दिया। उन्होंने 12 बीघा जमीन में गेहूं बोया था। बेटे धर्मदास ने बताया कि उन्होंने एसबीआई से 70 हजार का लोन लिया था। आठ बीघा लाही और दो बीघा मसूर खराब हो जाने से वह पहले से ही टेंशन में रहते थे अब गेहूं ने उनकी उम्मीद तोड़ दी थी। मीरगंज के हुरहुरी में  शनिवार को खेत देखने गए 62 वर्षीय गोविंदराम मौर्य का गेहूं और मसूर की बर्बादी से दिल ऐसा बैठा कि घर लौटते ही दिल का दौरा पड़ा और मौत हो गई।  पूरे परिवार में महज सात बीघा जमीन है। बड़ौदा उप्र ग्रामीण बैंक हुरहुरी शाखा से तीन साल पहले 30 हजार रुपया कर्जा भी निकाला था। कई साहूकारों का भी कर्जा अलग से था। हलका लेखपाल ने गांव पहुंचकर गोविंदराम की फसल का स्थलीय सर्वे कर रिपोर्ट तहसीलदार को सौंप दी है।
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