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बरेली जिले में चार और किसानों की जान गई

Sat, 04 Apr 2015 12:56 AM IST
बरेली
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कर्ज में डूबे किसान फसल की बर्बादी के कारण सदमे से दम तोड़ते जा रहे हैं। शुक्रवार को चार और किसानों की सदमे के चलते जान चली गई। बहेड़ी के बंजरिया में पत्नी के साथ काम कर रहा किसान गश खाकर खेत में ही गिर पड़ा। शेखूपुर निवासी किसान किच्छा नदी में पानी बढ़ने से सब्जी की पालेज खराब हो जाने पर पालेज में ही दम तोड़ बैठा। हाफिजगंज के संतोषपुर गांव का 60 साल का किसान भी सुबह खेत में पड़ा मिला। आंवला में गैनी गांव का युवा किसान भी फसल की बर्बादी बर्दाश्त नहीं पाया। राजस्व विभाग की टीमों ने गांवों में जाकर फसल नुकसान का सर्वे किया है।
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बहेड़ी के बंजरिया गांव के 60 वर्षीय गुलाम रसूल शुक्रवार सुबह दस बजे अपने खेत में मसूर की फसल काटने पत्नी रहीसन के साथ गए थे। वहां जमीन पर पड़ी फसल की बाली तोड़कर देखा तो उसमें दाना नहीं था। इसे देखकर वह गश खाकर गिर पड़े। पत्नी ने समझाया मगर गुलाम ने कहा कि सब बर्बाद हो गया है। बैंकों का कर्ज कैसे चुकाऊंगा। बेटी की शादी कैसे होगी। गुलाम की आवाज बंद होने पर रहीसन चीख पड़ी। इस पर गांव के ही मुस्ताक अहमद, इरफान और छोटे दौड़कर पहुंचे और उन्हें प्राइवेट डॉक्टर के पास ले गए। वहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। गुलाम ने एसबीआई की किच्छा शाखा से 80 हजार और जिला सहकारी बैंक से 20 हजार से ज्यादा कर्ज लिया था। बैंक वाले ब्याज जमा करने के लिए दबाव बना रहे थे। सात बीघा जमीन में गेहूं की फसल के लिए महाजन से दस हजार रुपये कर्ज लिए थे। चीनी मिल से गन्ने का भुगतान देर से मिलने के कारण उन्होंने गन्ने की जगह गेहूं बोना शुरू कर दिया था। उधर , शेखूपुर निवासी इरशाद अहमद (60) पुत्र अब्दुल मजीद ने अपने दस पार्टनरों के साथ मिलकर ग्राम लोधीपुर में किच्छा नदी की तलहटी में करीब बीस बीघा जमीन पर सब्जी की पालेज लगाई थी। देर शाम किच्छा नदी में पानी आ जाने से पालेज खराब हो गई। खेत पर सिर पर हाथ रखने के बाद उन्होंने अपने साथियों से कहा अब तो बर्बाद हो गए। कुछ देर बाद ही उन्होंने सदमे में प्राण त्याग दिए। देर रात को उनका शव घर लाया गया।
 हाफिजगंज के संतोषपुर गांव के 60 वर्षीय रामस्वरूप ने इस बार अपनी सात बीघा जमीन में से पांच बीघा पर गेहूं बोया था। शुक्रवार सुबह वह सात बजे खेत पर गए थे। काफी देर तक लौटकर नहीं आए तो भाई मुक्ता प्रसाद भी खेत में पहुंच गए। वहां रामस्वरूप अचेत अवस्था में पड़े मिले। ग्रामीणों को बुलाया गया मगर तब तक उनकी सांसें थम चुकी थी। सूचना पर तहसीलदार मलखान सिंह यादव, एसओ अमर सिंह, लेखपाल नरेश पाल सोलंकी भी गांव पहुंच गए। तहसीलदार ने फसल नुकसान की रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश लेखपाल को दिए हैं। मुक्ता प्रसाद ने बताया कि भाई ने बैंक ऑफ  बड़ौदा की हरहरपुर शाखा और ग्रामीण बैंक राजघाट से दो साल पहले लगभग सवा लाख का लोन लिया था। बैंक वाले लोन जमा करने के लिए लगातार दबाव बना रहे थे।
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आंवला के गैनी गांव के 32 वर्षीय नेम चंद्र उर्फ भूरे कश्यप 15 बिस्वा जमीन में बोई गेहूं की बर्बादी को देख सदमे में आ गया था। बृहस्पतिवार दोपहर खेत से लौटा तो सीने में दर्द की शिकायत की। घर वाले उसे बरेली के प्राइवेट अस्पताल में ले गए। देर रात उसने दम तोड़ दिया। गांव पहुंचे राजस्व निरीक्षक जागन लाल मौर्य, लेखपाल महेश रस्तोगी ने 65 प्रतिशत नुकसान की रिपोर्ट तहसील प्रशासन को भेजी है।
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