बहादुरपुर गांव के 55 वर्षीय असगर अली शाह के हिस्से में 12 बीघा जमीन थी। पूरी जमीन में उसने गेहूं की फसल बोई थी। उस पर उप्र सहकारी ग्राम्य विकास बैंक (पूर्ववर्ती भूमि विकास बैंक) मीरगंज शाखा के अलावा नंदगांव सहकारी समिति का कर्जा था। हालांकि लोन कितना था, बैंकों की दो दिन की छुट्टी की वजह से शाखा प्रबंधक देवेश कुमार सिंह यह जानकारी नहीं दे पाए। साहूकारों के 80 -85 हजार रुपये कर्ज ले रखा था, उस पर मोटे सूद चढ़ने से भी वह परेशान था। फसल बर्बाद होने से वह पूरी तरह टूट गया था। इसी सदमे ने उसकी जान ले ली। सूचना पर तहसीलदार कुंवर बहादुर सिंह की अगुवाई में राजस्व विभाग की टीम गांव पहुंची और फसल के नुकसान का स्थलीय सर्वे किया।
असगर की दो बेटियों समेत छह बच्चे हैं। वह बड़ी बेटी कल्लो का ही निकाह कर पाया था। दूसरी बेटी खुशनुमा उर्फ छोटी का निकाह दो महीने बाद होना है। बेटे अकबर, अफसर, बाबू, भूरा दिल्ली में मजदूरी करते हैं। घर की आर्थिक स्थिति डांवाडोल चल रही थी। बुधवार देर शाम अस्पताल में ही मौत हो जाने के बाद घर वाले बिना पोस्टमार्टम के ही असगर अली की लाश गांव लाए तो घर में कोहराम मच गया। छोटेे भाई मजहर अली ने बताया कि असगर और वह अपने-अपने परिवारों के साथ गांव में अलग-अलग रहते थे।
कोट
असगर अली की मौत सुसाइड केस नहीं है। 28 मार्च को दिल का दौरा पड़ने पर उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बुधवार देर शाम अस्पताल में ही उसकी मौत हुई है। ओलावृष्टि में 50 फीसदी से ज्यादा फसल तबाह हुई है। कर्ज के बारे में जानकारी नहीं है। नुकसान की रिपोर्ट बनाकर भेजी जा रही है। मुआवजे का फैसला उच्चाधिकारी ही करेंगे।
-कुंवर बहादुर सिंह, तहसीलदार, मीरगंज।
02एमआरजेडपी1-मीरगंज के जौनेर गांव में हार्ट अटैक से मरे पप्पू गुप्ता की ओलावृष्टि से बर्बाद फसल
02 एमआरजेड पप्पू गुप्ता का फाइल फोटो।
02एमआरजेडपी5-पप्पू गुप्ता की बेवा पत्नी सोनी और बच्चे।
पप्पू पर पहले फालिज की मार और अब कुदरत की
परिवार वालों ने हार्टअटैक बताया, मोहल्ले ने कहा- जहर खाकर जान दी
अमर उजाला ब्यूरो
मीरगंज। साल भर पहले फालिज पड़ने से शारीरिक रूप से लाचार हो चुके जौनेर के किसान 36 वर्षीय पप्पू को कुदरत ने कहीं का न छोड़ा। ओलों और बारिश से 12 बीघा खेती वाले इस किसान की गेहूं की फसल चौपट हो गई। परिवार वालों के अनुसार तभी से वह भारी तनाव में थे। हरदम बेचैन रहते थे।
पप्पू अपने पीछे बड़े भाई रामबाबू के अलावा पत्नी सोनी और छह मासूम बच्चों की कच्ची गृहस्थी छोड़ गए हैं। बेटियों में प्रिया 18, मुस्कान 7, वैष्णवी 5 वर्ष और बेटों में शिवम 16, सत्यम 14, तीन साल का सुंदरम हैं। पत्नी सोनी ने बताया कि एसबीआई मीरगंज शाखा से तीन साल पहले किसान क्रेडिट कार्ड पर 48 हजार रुपये कर्जा भी लिया था। फालिज का अटैक पड़ने से पहले वह गल्ले की खरीद-फरोख्त का काम करते थे। बड़ा बेटा शिवम हाईस्कूल और सबसे बड़ी बेटी प्रिया कक्षा तीन के बाद पढ़ाई आगे जारी नहीं रख सकी। बड़े भाई रामबाबू किराने की दुकान करते हैं। उनकी हालत भी ऐसी नहीं कि पप्पू की मदद कर सकें। आर्थिक तंगहाली के चलते कोई कारोबार भी ढंग से नहीं चल पा रहा था। घर वालों ने प्रशासन को सूचित किए बगैर अंत्येष्टि कर दी। इससे गांव वालों में ये चर्चा है कि पप्पू ने जहर खाकर जान दी। पप्पू पिछले कुछ सालों से सिंधौली चौराहे के पास मकान बनाकर रह रहे थे।
प्रशासन तो कागजी घोड़े दौड़ा रहा
मीरगंज। तेज हवाओं के साथ कई दिन की बारिश और ओलावृष्टि से तहसील क्षेत्र के ज्यादातर गांवों में गेहूं की फसल खेतों में बिछ गई है। पके गेहूं की बालियां गीले खेतों में ही सड़ चुकी हैं। किसान मौत के मुंह में जा रहे हैं लेकिन प्रशासन की कवायद कागजी घोड़े दौड़ाने तक सीमित है। पूरी फसल बर्बाद होने का गम न झेल पाने से सिमरिया ग्राम पंचायत के मजरा रम्पुरा किसानान में 38 वर्षीय प्रेमपाल वर्मा ने आत्मदाह कर लिया था तो संजरपुर से आकर हुरहुरी में बसे दूसरे किसान वेदराम गंगवार ने पेड़ पर फांसी लगाकर जान दे दी थी। बुधवार को दो और किसान सदमे से चल बसे। तहसीलदार कुंवर बहादुर सिंह ने बताया कि तहसील क्षेत्र के 245 गांवों में से अभी सिर्फ दो दर्जन गांवों में ही राजस्व टीम स्थलीय सर्वे कर पाई है। 650 पीड़ित किसानों की सूचियां बनाई गई हैं। हालांकि अभी 90 फीसदी गांवों का सर्वे होना बाकी है। तहसीलदार बताते हैं कि असिंचित रकबे का मुआवजा नौ हजार और सिंचित क्षेत्र का मुआवजा 18 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर निर्धारित किया गया है।
महेश की तो 75 फीसद फसल बर्बाद हो गई थी
राजस्व टीम पहुंची कीरतपुर गांव, किसान महेश की मौत पर घर में कोहराम
अमर उजाला ब्यूरो
आंवला/भमौरा। बर्बाद फसल देख खेत में ही दम तोड़ने वाले आलमपुर जाफराबाद ब्लॉक के कीरतपुर गांव के किसान महेश यादव के घर में कोहराम मचा हुआ है। बृहस्पतिवार को राजस्व निरीक्षक वाहिद खां और लेखपाल रामचरन ने गांव पहुंचकर फसल का सर्वे किया। दोनों ने 75 प्रतिशत फसल के बर्बाद होने की बात कही है।
45 वर्षीय महेश यादव को बुधवार सुबह खेत में दिल का दौरा पड़ा था। उसकी 17 बीघा जमीन में बोई फसल बर्बाद हो गई थी। उसने इंडियन ओवरसीज बैंक की इफको शाखा और जिला सहकारी बैंक भमोरा से कर्ज भी लिया था। महेश की 17 बीघा जमीन में से नौ बीघा जमीन चाचा जिलेदार की थी। चाचा की मौत के बाद यह जमीन भी महेश के नाम हो गई थी। तहसीलदार मनोज कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि घर वालों को मुआवजा राशि के अलावा मुख्यमंत्री राहत कोष से आर्थिक सहायता दिलवाने की संस्तुति की जाएगी।
कैसे होंगे बिटिया के हाथ पीले
आंवला। महेश यादव की मौत से परिवार टूट गया है। तीन बहनों सुधा, विमलेश, यशोदा, दो भाई सतेंद्र, पिंकू और मां चौत्रा देवी की जिम्मेदारी 20 वर्षीय जितेंद्र पर आ गई है। चौत्रा देवी को भी बच्चों के पालन-पोषण की चिंता सता रही है। अगले महीने बड़ी बेटी सुधा की शादी होनी है। उसका रिश्ता सहसवान (बदायूं) के हसुआआरा गांव के रवींद्र से तय हुआ है। तहेरे भाई धर्मपाल ने बताया कि महेश बेटी की शादी की चर्चा करते रहता था। फसल बर्बाद देख वह अक्सर कहता था कि अब शादी कैसे कर पाऊंगा।
सत्यपाल के भतीजों को नहीं मिलेगी आर्थिक सहायता
आंवला। सदमे से जान देने वाले मझगवां के फुलासी गांव के किसान सत्यपाल के भतीजों को सरकारी मदद के लिए इंतजार करना पड़ेगा। सत्यपाल की पत्नी और संतान न होने के कारण तहसील प्रशासन असमंजस की स्थिति में है। तहसीलदार मनोज कुमार श्रीवास्तव ने बताया इस मामले में उच्च अधिकारियों से राय ली जा रही है। उन्होंने बताया कि मिलक मंझारा के पूर्व प्रधान शिशुपाल के घर वालों को मुख्यमंत्री राहत कोश से पांच लाख रुपये की मदद दिलवाने की संस्तुति अफसरों को भेज दी गई है।
धर्मपाल ने कहा, 20 लाख की मदद मिले
आंवला। विधायक धर्मपाल सिंह ने बर्बाद फसल के कारण जान गंवाने वाले किसानों को पांच लाख की आर्थिक सहायता को कम बताया है। उन्होंने कहा कि फुलासी के सत्यपाल, कीरतपुर के महेश यादव और खट्ेटा के लच्छू सिंह के घर वालों को 20 लाख की सहायता दिलाने के लिए वह मुख्यमंत्री से मिलेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन सरकार के इशारे पर सर्वे कर रहा है। किसानों का नुकसान कम दिखाने की कोशिश हो रही है।
आंवला को 22 लाख नवाबगंज को मिले 21 लाख
आंवला/नवाबगंज। किसानों को मुआवजा देने के लिए तहसील प्रशासन को 22 लाख रुपये मिल गए हैं। तहसीलदार मनोज कुमार श्रीवास्तव ने बताया दो दिन में सर्वे पूरा हो जाएगा। फाइनल सूची बनने के बाद किसानों को चेक बांट दिए जाएंगे।
उधर नवाबगंज तहसील प्रशासन को किसानों को मुआवजा देने के लिए 21 लाख रुपए मिले हैं। बृहस्पतिवार को 10 लाख के चेक जारी कर दिए गए हैं। तहसीलदार मलखान सिंह ने बताया कि फसल का सर्वे कराया जा रहा है। चार दर्जन से अधिक गांवों की रिपोर्ट मिल गई है। जिन किसानों के खाता नंबर मिल गए हैं, उनके खाते में मुआवजे की धनराशि भेजी जा रही है। तहसीलदार ने बताया कि गूलरडांडी, गेलाटांडा, त्यार-जागीर, सिजौलिया, सैदूपुर, डंडिया वीरमनगला, रघुनाथपुर, भौआ-बाजार, गोपालपुर, रुकुमपुर और वैवाही आदि गांवों की सर्वे रिपोर्ट आ गई है। उधर, ईधजागीर गांव के मेहंदी हसन ने सर्वे नहीं कराए जाने का आरोप लगाया है। उसने कहा कि तीन बीघा जमीन पर गेहूं की फसल बर्बाद हो गई है।
नही मिला चेक, इंतजार करते रहे परिवार के लोग
भमोरा। कर्ज व फसल बर्बादी के चलते जहर खा कर आत्महत्या करने वाले मिलक मझारा के पूर्व प्रधान शिशुपाल के परिवार वाले बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री राहत कोष से मिलने वाले पांच लाख रुपये के चेक का इंतजार करते रहे। लेकिन कोई अधिकारी या नेता चेक देने नहीं पहुंचा। शिशुपाल के बेटे सुधीर ने बताया पिता की मौत के बाद वे संस्कार क्रियाओं में लगे हैं। खेतों में बची-खुची फसल भी बर्बाद हो रही है।