नहीं खुले मंदिरों के कपाट, कई मंदिरों में बाहर लगी स्क्रीन पर हुआ श्रीकृष्ण जन्म का प्रसारण
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घरों में भी धूमधाम से मनी जन्माष्टमी मगर नहीं सजीं झांकियां
बरेली। कोरोना के दौर में भगवान श्रीकृष्ण ने मंदिरों के बंद दरवाजों के भीतर जन्म लिया। मंदिरों के बाहर भक्तों का जमघट तो लगा लेकिन उन्हें अंदर आने की अनुमति नहीं दी गई। प्रमुख मंदिरों के गेट पर बड़ी स्क्रीन लगाकर श्रीकृष्ण जन्म का प्रसारण किया गया, भक्तों ने बाहर से ही मंगलगीत गाकर बधाई दी। इसके बाद आरती में भी भक्तों ने इसी तरह भागेदारी की।
श्री बांके बिहारी मंदिर के पूरे हॉल को फूलों से सजाया गया था जहां शाम को महिला संगीत मंडल ने बांके बिहारी और राधा रानी के सुमधुर भजन गाए। मुख्य पुजारी रामअवध मिश्र ने भगवान को छप्पन भोग अर्पित किया। शाम को छह बजे ही मंदिर का मुख्य गेट बंद कर दिया गया। गेट के पास ही बड़ी स्कीन लगा दी गई थी जिस पर भक्त तन्मय होकर अंदर के कार्यक्रम देखते रहे। रात 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ जिसके बाद उन्हें पंचामृत से स्नान कराकर अभिषेक किया गया। अभिषेक के बाद आरती हुई। इस दौरान अच्छी-खासी संख्या में बाहर भक्त जमे रहे।
श्री हरि मंदिर का मुख्य गेट भी पूरी तरह बंद रखा गया। यहां भी गेट पर बड़ी स्क्रीन लगाई गई थी। अंदर मंदिर के मुख्य पुजारी रामचंद्र तिवारी ने पूजा-अर्चना की। यहां भगवान को बहुत सादगी के साथ सजाया गया था। पूरा मंदिर परिसर भी फूलों और बिजली की झालरों से सजा था। 12 बजने के बाद जैसे ही टोकरी में विराजमान भगवान ने मंदिर में प्रवेश किया तो पूरा माहौल घंटे-घड़ियाल, ढोलक-मजीरे की आवाज के साथ शंखनाद से गूंज उठा। बाहर मौजूद भक्तों ने स्क्रीन पर ही देर रात तक सारे कार्यक्रमों का आनंद लिया। सनातन धर्म मंदिर को भी आकर्षक ढंग से सजाया गया था। यहां भगवान कृष्ण की पोशाक गोवर्धन से आए कारीगरों ने सिली थी। जन्मोत्सव की शुरुआत सुबह हवन से हुई। शाम चार बजे पांच महिलाओं ने संकीर्तन किया और फिर पांच बजे मंदिर का मुख्य गेट बंद कर दिया गया। रात 11.30 बजे मंदिर खोलकर 12 बजे प्राकट्य उत्सव मनाया गया। कृष्ण जन्म के बाद बधाई गीत गाए गए। प्रसाद वितरण के बाद फिर कपाट बंद कर दिए गए। चुन्ना मियां के मंदिर में लोगों ने आपसी दूरी रखते हुए दर्शन किए। सभी मंदिरों में पुलिस फोर्स तैनात रहा।
श्री त्रिबटीनाथ मंदिर में कान्हा के दर्शन करने पहुंचे भक्त
श्री त्रिबटीनाथ मंदिर का मुख्य गेट और कपाट शाम को बंद नहीं किए गए। भक्त आपसी दूरी का ख्याल रखते हुए मंदिर परिसर में भगवान के दर्शन करते रहे। देर रात तक मंदिर में भक्तों का आना-जाना लगा रहा। घरों में भी जन्माष्टमी की पूजा धूमधाम से की गई। हालांकि कोरोना की वजह से इस बार घरों में लोगों ने झांकियां नहीं सजाईं।