बरेली। दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में कबाड़ घोषित कारें बरेली की सड़कों पर रफ्तार भर रहीं हैं। जिले में औसतन रोजाना 80-90 पुराने वाहनों की खरीद-फरोख्त हो रही है। इनमें औसतन 18-20 वाहन दिल्ली-एनसीआर के होते हैं, जो वहां स्क्रैप की श्रेणी में आ चुके होते हैं। यहां पंजीकरण नवीनीकरण के बाद उनकी उम्र पांच साल बढ़ जाती है।
नई स्क्रैप पॉलिसी लागू होने के बाद 10 साल पुराने डीजल वाहनों और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों को चलन से बाहर कर दिया गया है। दिल्ली-एनसीआर में ऐसे वाहनों का संचालन पूरी तरह प्रतिबंधित है। नई स्क्रैप पॉलिसी आने के बाद यहां के छह लाख से ज्यादा वाहन संचालन से बाहर हो चुके हैं। वहां ऐसे पुराने वाहनों की सस्ती दरों पर धड़ल्ले से बिक्री हो रही है। बरेली में पंजीकृत वाहनों की संख्या 9.70 लाख से ज्यादा है। इनमें भी 3.60 लाख से ज्यादा वाहन नई स्क्रैप पॉलिसी के तहत मियाद पूरी कर चुके हैं। इन वाहनों के भी पंजीकरण नवीनीकरण की होड़ मची है। वाहनों की संख्या बढ़ने से सड़कों पर दबाव और प्रदूषण भी बढ़ रहा है।
परिवहन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक एक दिसंबर 2024 से 10 जनवरी 2025 तक बरेली में तीन हजार से ज्यादा पुराने वाहनों की खरीद-फरोख्त हुई है। इनमें दिल्ली-एनसीआर के 760 से ज्यादा वाहन शामिल हैं। ये बरेली में पंजीकृत कराए जा चुके हैं।
एनसीआर के ज्यादा वाहन, दिल्ली की संख्या कम
दिल्ली-एनसीआर के जिन पुराने वाहनों को बरेली ट्रांसफर कराकर पंजीकरण का नवीनीकरण कराया जा रहा है, उनमें एनसीआर के जिलों के वाहनों की संख्या ज्यादा है। दरअसल, एनसीआर के तहत आने वाली यूपी के जिलों में पंजीकृत चार पहिया वाहन का प्रदेश के दूसरे जिले में पंजीकरण नवीनीकरण पर शुल्क 800-1,000 रुपये और बाइक पर 300-700 रुपये है, जबकि दिल्ली के वाहनों का अगर ट्रांसफर कराकर बरेली या अन्य जिले में पंजीकरण नवीनीकरण कराया जाता है तो चार पहिया पर 8,000 रुपये और दोपहिया पर 4,000 रुपये तक शुल्क देना पड़ता है। इसकी प्रक्रिया भी कुछ जटिल होती है।
नई स्क्रैप पॉलिसी का लाभ लेने आगे नहीं आ रहे वाहन स्वामी
नई स्क्रैप पॉलिसी में पुराने वाहन को को अधिकृत स्क्रैप सेंटर पर स्क्रैप कराने पर नए वाहन के पंजीकरण और टैक्स पर 10 फीसदी तक की छूट मिलती है, लेकिन लोग इसके लिए आगे नहीं आ रहे।
कुछ समय से दिल्ली-एनसीआर के पुराने वाहनों को बरेली ट्रांसफर कराकर उनके पंजीकरण नवीनीकरण कराने वालों की संख्या बढ़ी है। जिले में रोजाना औसतन 90 पुराने वाहनों की खरीद-फरोख्त हो रही है। इनमें 18-20 वाहन दिल्ली-एनसीआर के होते हैं। - मनोज कुमार, एआरटीओ प्रशासन/नोडल अधिकारी
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आंवला। वाल्व जो फट गया था-संवाद