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Bareilly News: मरीजों को बाहर की दवा लिख रहे जूनियर डॉक्टरों को चेतावनी

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बरेली। जिला अस्पताल में मरीजों को बाहर की दवा लिखने के मामले की शनिवार को एडी एसआईसी ने जांच कराई। जूनियर डॉक्टरों की ओर दवा लिखने की पुष्टि होने पर एडी एसआईसी ने इंटर्नशिप निरस्त करने की चेतावनी दी है। साथ ही, मेडिकल कॉलेजों को भी पत्र भेजा है।
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निजी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी होने के बाद जूनियर डॉक्टरों को सरकारी अस्पतालों में तीन से छह माह की इंटर्नशिप करनी पड़ती है। वह ओपीडी में विशेषज्ञ चिकित्सक के साथ मरीजों को देखते हैं और दवाएं लिखते हैं। एडी एसआईसी डॉ. अजय मोहन के मुताबिक, अमर उजाला में प्रकाशित खबर का संज्ञान लेकर जूनियर डॉक्टरों से पूछताछ की गई तो वे कई दवाओं के साल्ट नेम नहीं बता सके। इसलिए उन्होंने ब्रांड नेम लिख दिया। दवा काउंटर पर कतार से इतर मरीज जन औषधि केंद्र पहुंचे तो ब्रांड नेम देख संचालक ने बाहर भेज दिया।
पर्चे पर ब्रांड नेम से दवा लिखना सरासर गलत है। प्रकरण पर सभी इंटर्न को चेतावनी दी गई है। साथ ही, उनके मेडिकल कॉलेजों को पत्र भेजकर भविष्य में अगर बाहर की या ब्रांड नेम से दवा लिखने का प्रकरण सामने आया तो इनकी इंटर्नशिप निरस्त किए जाने के लिए चेताया है। ब्यूरो
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इन ब्रांड नेम से लिखी गई थीं दवाएं
शुक्रवार को अमर उजाला की टीम ने जिला अस्पताल का जायजा लिया था। कई मरीज बाहर निजी मेडिकल स्टोर से दवा खरीद रहे थे। मरीजों ने बताया था कि डॉक्टर ने बाहर की दवा लिखी है। इसमें सिप्लॉक्स आई ड्रॉप, कोलकेड ड्रॉप, डूओलिन रेस्प्यूल्स, एलसीजी सिरप, पोलीडेक्स आईड्रॉप आदि दवाएं लिखी थीं। इनकी कीमत 50 से सौ रुपये तक है।
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