हादसे के बाद हुई ताबड़तोड़ कार्रवाई
ओवरहेड टैंक ढहने के मामले की जानकारी के बाद जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के निर्देश पर चार मई को ही ताबड़तोड़ कार्रवाई हुई थी। निर्माणदायी संस्था एनसीसी लिमिटेड के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। जल निगम ग्रामीण के जेई को निलंबित कर दिया गया था। राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन के सहायक अभियंता के खिलाफ विभागीय जांच और एक्सईएन के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। थर्ड पार्टी जांच करने वाली संस्था बीएलजी के बरेली स्थित सभी कर्मचारियों और अधिकारियों को हटा दिया गया था। कंपनी पर जुर्माना भी लगाया गया था।
मिट्टी की जांच कराए बिना बना दिया था टैंक
जिलाधिकारी अविनाश सिंह की ओर से अपर जिलाधिकारी प्रशासन पूर्णिमा सिंह से सरदारनगर में हुए हादसे की जांच कराई गई थी। इसमें सामने आया था कि जल निगम की ओर से ओवरहेड टैंक का निर्माण बलुई मिट्टी पर किया गया। मिट्टी की जांच भी नहीं कराई गई। हादसे में कुछ दिन पहले बारिश होने से तालाब ओवरफ्लो हुआ और टैंक के आसपास मिट्टी न होने से वह धराशायी हो गया। अमर उजाला ने जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए सात मई के अंक में प्रमुखता से खबर प्रकाशित की। इसके बाद जिलाधिकारी ने जल जीवन मिशन के तहत निर्माणाधीन और बन चुके 800 से ज्यादा टैंकों की जांच के निर्देश दिए थे। प्रारंभिक जांच रिपोर्ट शासन को भेजी गई थी।
गोकुल बैराज पार्ट-1 के काम में भी लापरवाही बरतने का है आरोप
निलंबित अधिशासी अभियंता कुमकुम गंगवार पर मथुरा में अधिशासी अभियंता ड्रेनेज एवं सीवरेज इकाई के पद पर रहते हुए मथुरा पेयजल पुनर्गठन योजना थ्रू गोकुल बैराज पार्ट-1 के निर्माण में भी लापरवाही बरतने का आरोप है। योजना के अनुसार कृष्णा विहार कॉलोनी, मथुरा निर्मित जलाशय 30 जून 2024 को क्षतिग्रस्त होकर गिर गया था। जांच में जलाशय की गुणवत्ता खराब होने, काम में अनियमितता बरतने, विभाग को आर्थिक क्षति पहुंचाने, शासन के आदेश का अनुपालन न करने व आम जनमानस के समक्ष शासन की छवि धूमिल करने के आरोपों की पुष्टि हुई थी। इस मामले में भी कुमकुम गंगवार को दोषी पाते हुए कार्रवाई की जद में लाया गया है।