दूध में घुले एंटीबायोटिक्स का सेवन नुकसानदेह
गोवंश में थनैला रोग होने पर पशुपालक एंटीबायोटिक को स्तन ग्रंथि (थन) में इंजेक्ट करते हैं। चार से पांच दिन तक दूध न निकालने का सुझाव दिया जाता है। हालांकि, चार दिन के आर्थिक नुकसान से बचने के लिए इस सुझाव को नजरंदाज कर दूध निकाल लिया जाता है। ऐसे में दूध के जरिये एंटीबायोटिक के भी शरीर में पहुंचने की आशंका होती है।
चूहों पर सफल रहा प्रयोग
खोजे गए रोगाणुरोधी पेप्टाइड्स को डॉ. समीर की प्रयोगशाला में संश्लेषित कर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की ओर से चिह्नित सात घातक बैक्टीरिया ईएसकेएपीईई पर बड़े पैमाने पर परीक्षण किया गया। संश्लेषित पेप्टाइड्स की विषाक्तता (टॉक्सिसिटी) का परीक्षण विभिन्न जानवरों की लाल रक्त कोशिकाओं में किया गया। बैक्टीरिया से संक्रमित चूहों पर न्यूनतम विषाक्त प्रभाव वाले एंटीमाइक्रोबियल पेप्टाइड्स का लेप लगाया। बैक्टीरिया से संक्रमित जले हुए घाव पर भी यह असरदार साबित हुआ। प्रयोगों के परिणाम अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए। अब पशुओं पर परीक्षण की तैयारी है।