बरेली। पशुओं के कृत्रिम गर्भाधान के लिए जल्द भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान इज्जतनगर एंबुलेंस (मोबाइल वेटरनरी यूनिट) संचालित करेगा। मनुष्यों की तरह इस एंबुलेंस से पॉलीक्लिनिक नहीं लाए जाएंगे बल्कि विशेषज्ञ चिकित्सक घर पर ही इलाज करेंगे।
साथ ही किसानों की मदद के लिए इस यूनिट से खनिज मिश्रण, कृमिहरण अन्य डेयरी संबंधित पशु आहार का वितरण भी किया जाएगा। इसके लिए बीते दिनों आईवीआरआई और पुणे की जीन्स ब्रीडिंग इंडिया कंपनी से करार हो चुका है। संस्थान निदेशक डॉ. त्रिवेणी दत्त के मुताबिक एमवीयू का अहम कार्य पशुओं के कृत्रिम गर्भाधान से संबंधित है। साथ ही जरूरत पड़ने पर पशु चिकित्सकीय सेवा भी मुहैया कराई जा सकती हैं। उन्नत नस्ल के सीमेन से कृत्रिम गर्भाधान होने पर डेयरी किसानों की आजीविका में सुधार होने की उम्मीद जताई है।
सीड विलेज बरेली के अखा गांव में बन चुका है। जहां साहीवाल गाय के जन्म के लिए उन्नत नस्ल का सीमेन सुरक्षित रखा गया है। यहां पहुंचकर किसान कृत्रिम गर्भाधान करा सकेंगे। प्रोजेक्ट मार्गदर्शन संस्थान के निदेशक डॉ. त्रिवेणी दत्त व संयुक्त निदेशक डॉ. रूपसी तिवारी कर रही हैं।
एमवीयू में तरल नाइट्रोजन क्रायोकैन, थाविंग यूनिट, सिंक्रोनाइजेशन किट, डिजिटल एआई गन, पशु रिक्गनीशन टैग, सेक्स सॉर्टेड सीमेन स्ट्रॉ और अन्य उपकरण मौजूद रहेंगे। साथ ही यूनिट किसान गोष्ठी, बांझपन शिविर, किसान-वैज्ञानिक संवाद, जागरूकता, जनसंपर्क में सहयोग करेगी।
दुधारू पशुओं (गाय-भैंस) का सेक्स सॉर्टेड सीमेन से निशुल्क कृत्रिम गर्भाधान होगा। इससे सिर्फ बछिया-पड़िया का ही जन्म होगा। प्रोजेक्ट के तहत तीन वर्ष में शहर की सीमा से सटे चार ब्लॉकों के नौ हजार पशुओं का कृत्रिम गर्भाधान होगा। करीब एक करोड़ का बजट मंजूर हुआ है।
आईवीआरआई के पशु पुनरुत्पादन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. एमएच खान के मुताबिक सीएसआर फंड के तहत यह प्रोजेक्ट शुरू हो रहा है। कंपनी ने 15 मई तक एमवीयू उपलब्ध कराने की बात कही है। इसके बाद चयनित पशुपालकों समेत अन्य किसानों को इसका लाभ मिलेगा।
वैज्ञानिकों के मुताबिक बछड़े-पड्डे के जन्म से पशुपालकों को अनावश्यक खर्च उठाना पड़ता है। इससे वे निजात चाहते हैं। फील्ड ट्रायल से पूर्व आईवीआरआई के डेयरी फार्म में उन्नत नस्ल की बछिया-पड़िया जन्म के लिए कृत्रिम गर्भाधान कराया गया। 90 फीसदी सफलता मिली।