इंडियन टरपनटाइन एवं रोजन कंपनी (आईटीआर) के जल्दी ही दिन बहुरने वाले हैं। राज्य सरकार को इसे आबाद करने के लिए किसी फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री की जरूरत है। औद्योगिक विकास आयुक्त की ओर से यहां के लिए ऐसे उद्यमी के प्रयास किए जा रहे हैं जो कि 250 से लेकर 700 करोड़ रुपये तक निवेश कर सके। जिसका बाजार उत्तराखंड और यूपी में भी हो। पिछले पांच साल से सुपीरियर कंपनी का पांच साल से चला आ रहा विवाद हल हो गया है। जिसके आधार पर शराब बनाने वाली सुपीरियर कंपनी के पक्ष में रजिस्ट्री कराने के लिए एडीएम (फाइनेंस) के यहां से स्टांप शुल्क का ब्योरा लिया जा रहा है।
अधिकारियों का मानना है कि फैक्ट्री की इस जमीन में तारपीन और बिरोजा का उत्पादन संभव नहीं है। क्योंकि चीड़ के पेड़ों से इसके लिए कच्चा माल निकालने पर रोक लगा दी गई है । पिछले महीने यहां के लिए संभावित उद्योग का सर्वे कराया गया था, जिसमें फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री को यहां स्थापित कराना सही माना गया।
कमिश्नरी में फैक्ट्री की रिपोर्ट के खाका को अंतिम रूप दे दिया है। सर्किल रेट के अनुसार फैक्ट्री की 35 एकड़ जमीन ही करीब 700 करोड़ की मानी जा रही है। इसके अलावा करीब एक करोड़ रुपये की कबाड़ की लकड़ी भी है। जंग खाई मशीनरी और स्क्रेप की लागत दो से ढाई करोड़ आंकी गई है। इन दिनों सुपीरियर इसी परिसर में कंपनी के लिए जमीन किराए पर लेकर शराब उत्पादन कर रही है। इस कंपनी ने रेंट और ब्याज का विवाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर निस्तारित करते हुए करीब 20 करोड़ रुपये जमा करा लिए हैं। अब इस जमीन की रजिस्ट्री के लिए एडीएम (फाइनेंस) के यहां से जानकारी मांगी गई है कि इस पर कितना स्टांप शुल्क लगेगा।
पिछले दस साल से फैक्ट्री का विवाद बोर्ड ऑफ इंडस्ट्रियल एंड फ ाइनेंशियल रिकंस्ट्रक्शन, बीआईएफआर में लंबित है। इसके निस्तारण के लिए हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति को नामित करने का प्रावधान है। यदि बीमार उद्योग की जिम्मेदारियां कोई दूसरा उद्यमी ले लेता है तो समझौता हो जाता है। इसी तर्क के साथ सरकार अदालत के बाहर समझौता कर किसी उद्यमी को फैक्ट्री संचालित करने के लिए देने का प्रयास कर रही है। इसी महीने सुपीरियर को आईटीआईर का एक हिस्सा बेचने की एवज में 19 करोड़ रुपये मिल गए हैं। करीब चार करोड़ रुपये में पुरानी मशीनरी और लकड़ी बिक जाएगी। 40 करोड़ की देनदारी में से से 23 करोड़ की देनदारी निकालने के बाद बाकी के 17 करोड़ के लिए नए निवेशक की तलाश की जा रही है।
‘सुपीरियर कंपनी को स्टांप शुल्क अदा करके जमीन खरीदनी है। इसी के साथ-साथ यहां की खाली जमीन पर उद्योग स्थापित कराने के बारे में प्रयास किए जा रहे हैं।’ प्रमांशु कुमार, कमिश्नर