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Bareilly News: अलाव कहां जले पता नहीं, बिना ई-टेंडर के 13.89 लाख का भुगतान

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बरेली। नवाबगंज नगर पालिका की तत्कालीन अध्यक्ष शहला ताहिर के कार्यकाल में हुए घोटाले की गोपनीय बातें परत-दर-परत सामने आ गई हैं। हैरत की बात है कि वर्ष 2020-21 में ठंड कम हुई या फिर अलाव जलाने में कंजूसी दिखाई गई, जिससे अगले साल 2021-22 में 60 गुना अधिक 13.89 लाख का भुगतान कर दिया गया। अलाव कहां जले, कोई प्रमाण पालिका के दस्तावेजों में नहीं है। वर्ष 2020-21 में अलाव जलाने पर केवल 2.20 लाख रुपये खर्च हुए थे। फिलहाल, पालिका में हुई घपलेबाजी में शामिल तीन फर्मों से वसूली हो गई है, लेकिन पालिकाध्यक्ष व तत्कालीन अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई शासन से लंबित है।
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ग्राम्य विकास विभाग की टीएसी के तत्कालीन प्राविधिक परीक्षक अमित कुमार चौधरी की 16 जुलाई 2024 वाली रिपोर्ट सार्वजनिक हो गई है। रिपोर्ट में उल्लेख है कि वर्ष 2021-22 में अलाव के लिए लकड़ी व भूसी की खरीद के लिए निविदा प्राप्ति से लेकर लकड़ी आपूर्ति एवं वितरण की संपूर्ण प्रक्रिया वित्तीय नियमों के विपरीत और संदिग्ध है। मनचाही लागत पर लकड़ी-भूसी खरीद कर 13,27,136 रुपये का भुगतान किया गया है। इसके लिए ईओ शैलेंद्र कुमार व पालिकाध्यक्ष शहला ताहिर उत्तरदायी हैं। जलौनी लकड़ी व भूसी की स्टाॅक बुक पंजिका में विभिन्न तारीखों में स्टाॅक को निल किया गया है। अलाव के लिए लकड़ी किन-किन कर्मियों को जारी हुई, प्राप्तकर्ता से संबंधित किसी भी कर्मी के हस्ताक्षर नहीं हैं। विभिन्न तारीखों में अलाव कहां-कहां लगाए गए, कोई विवरण स्टाॅक पंजिका में नहीं हैं, न ही फोटाेग्राफ। इसी तरह जांच में पाया गया कि नियमों के विपरीत एक विशेष फर्म मैसर्स इंडियन वर्कस को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से वित्तीय नियमों को तार-तार कर मनचाही लागत 16.20 लाख के दो हजार कंबल वर्ष 2021-22 में खरीदे गए। इसे प्रथम दृष्टया गबन बताकर प्राविधिक परीक्षक ने ईओ शैलेंद्र कुमार व शहला ताहिर को उत्तरदायी माना है। ऐसे ही टीएसी के प्राविधिक परीक्षक ने डस्टबिन खरीद में 2,16,198 रुपये और निर्माण कार्यों में 1.86 लाख रुपये प्रथम दृष्टया गबन होने की बात कही है। संवाद

साइन बोर्ड खरीद में एक काम को तीन जगह बांटा
प्राविधिक परीक्षक की रिपोर्ट है कि तत्कालीन पालिकाध्यक्ष शहला ताहिर और ईओ शैलेंद्र कुमार ने 31.37 लाख रुपये से 250 साइन बोर्ड की आपूर्ति एक ही फर्म एमएस कंस्ट्रक्शन से ली थी। प्रत्येक साइन बोर्ड की लागत 11,705 रुपये दिखाई गई। परीक्षण में पाया गया कि एक ही सामग्री को तीन कार्यों में विभाजित कर 10 लाख से कम के तीनों कार्य करते हुए मैनुअल टेंडर लिए गए।
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रिक्शा ठेली खरीद में फंसे हैं तत्कालीन एसडीएम
रिक्शा ठेली खरीद कुटेशन के आधार पर एक ही फर्म से दुरभि संधि करते हुए 4,36,600 रुपये से एक ही फर्म से एक ही महीने में की गई। इसी तरह 5,44,275 रुपये की आपूर्ति भी एक ही फर्म से एक ही महीने में कुटेशन के आधार पर खरीद हुई। इसमें प्राविधिक परीक्षक ने टिप्पणी दी है कि रिक्शा ठेली खरीद में वित्तीय नियमों का अनुपालन नहीं किया गया है। जिसके लिए तत्कालीन अधिशासी अधिकारी वेद प्रकाश मिश्र एसडीएम नवाबगंज और ईओ गुलशन कुमार सूरी व पालिकाध्यक्ष शहला ताहिर पूरी तरह से उत्तरदायी हैं।
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