बरेली। मृत व्यक्ति को जमानती बनाकर बलवे के आरोपी की रिहाई के मामले में जनपद न्यायालय के प्रशासनिक अधिकारी ने विस्तृत जांच रिपोर्ट बृहस्पतिवार को जेसीएम सुरेश कुमार दुबे की कोर्ट में पेश कर दी है। मामले में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम की अदालत में तैनात रहे लिपिक राजकुमार की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। इस गंभीर प्रकरण में देर-सबेर कार्रवाई हो सकती है।
बारादरी थाना क्षेत्र के रोहली टोला निवासी शारिक अब्बासी ने बलवा, मारपीट, अपमानित करने व जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाते हुए साजिद, रईस मियां, शमशाद हुसैन और नजीबुर्रहमान समेत चार अन्य के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। कोर्ट में सरेंडर कर आरोपियों ने 23 अक्तूबर 2024 को जमानत प्रार्थनापत्र दिया। कोर्ट ने अर्जी स्वीकार कर ली। आरोपी शमशाद हुसैन का जमानती चक महमूद निवासी अनीस अहमद को दर्शाया गया है। शाकिर ने जमानत का विरोध करते हुए उच्च न्यायिक अधिकारियों से शिकायत की कि जमानती अनीस की मौत 27 जून 2023 को ही हो चुकी है।
सीजेएम सुरेश कुमार दुबे ने प्रशासनिक अधिकारी को मामले की जांच का आदेश दिया था। जांच में पाया गया है कि जमानत स्वीकृति के दौरान कोर्ट में लिपिक के पद पर 16 मई 2024 से 13 अगस्त 2025 तक राजकुमार की तैनाती थी। थाना बारादरी के सभी स्टेट वादों की फाइलों के रखरखाब और जमानतनामे पेश करने की जिम्मेदारी भी उसी की थी।