बरेली। गांवों में कूड़े के निस्तारण और ग्राम पंचायतों की आय बढ़ाने की मंशा से बनाए गए रिसोर्स रिकवरी सेंटर (आरआरसी) खुद बदहाली का शिकार हो गए हैं। जिले की 1,188 ग्राम पंचायतों में करोड़ों रुपये खर्च कर तैयार कराए गए अधिकतर केंद्रों पर ताले लटक रहे हैं। कुछ केंद्र खंडहर में तब्दील हो गए हैं।
पंचायती राज विभाग की ओर से स्वच्छ भारत मिशन फेज दो के तहत इन केंद्रों का निर्माण वर्ष 2021-22 में शुरू कराया गया था। वर्ष 2025 तक निर्माण कार्य पूरे हो गए। शुरुआत में कुछ केंद्रों पर कामकाज भी हुआ, लेकिन धीरे-धीरे इनका संचालन ठप होता गया। अब कई केंद्रों का इस्तेमाल ही नहीं हो रहा है।
आरआरसी सेंटरों के निष्क्रिय होने से गांवों में कचरा प्रबंधन की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि केंद्रों का नियमित संचालन नहीं हो रहा है तो घरों और सार्वजनिक स्थानों से निकलने वाले कूड़े का निस्तारण कैसे हो रहा है, यह भी जांच का विषय है। योजना के तहत खर्च की गई धनराशि (प्रति केंद्र दो से तीन लाख रुपये) का अपेक्षित लाभ ग्रामीणों तक पहुंचा या नहीं, इसकी समीक्षा भी जरूरी है।
सफाई कर्मी लापता, गंदगी के आगोश में केंद्र
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फतेहगंज पूर्वी के हरेली गांव में बना केंद्र अधूरा पड़ा है। चार साल से गांव में सफाई कर्मचारी नहीं है। नालियों की गंदगी गलियों में फैली रहती है। खुद ही ग्रामीण नालियों की सफाई करते हैं, लेकिन केंद्र का संचालन नहीं हो रहा है।
कागजों पर हो रहा केंद्र का संचालनफोटो
रामनगर की ग्राम पंचायत बरसेर सिकंदरपुर में एक साल पहले बनाया गया आरआर सेंटर का संचालन तक नहीं हो सका है। केंद्र के गेट पर ताला लगा है और परिसर में झाड़ियां उगी हुई हैं। जिम्मेदारों की अनदेखी से केंद्र का उपयोग नहीं हो पा रहा है।
केंद्र ठप, गंदगी की चपेट में गांव
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शेरगढ़ ब्लॉक के गांव गिरधरपुर में एक साल पूर्व आरआरसी का निर्माण कराया गया। ग्रामीणों को आस थी कि स्वच्छता का ग्राफ सुधरेगा, लेकिन प्रशासनिक अनदेखी के चलते केंद्र पर ताला लटका रहता है। वहीं, गांव की गलियों में गंदगी का अंबार लगा है।
वर्जन
स्वच्छता मिशन के तहत जिले की समस्त ग्राम पंचायतों में आरआरसी स्थापित कराए गए हैं। इनके संचालन और अन्य गतिविधियों की निगरानी भी की जा रही है। अगर केंद्रों के संचालन की स्थिति ठीक नहीं है तो निरीक्षण कर सुधार कराया जाएगा। - कमल किशोर, जिला पंचायती राज अधिकारी