पीलीभीत। जांच टीम किस तरह मामले की तह तक पहुंचना चाहती है। इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि टीम अपने साथ एक प्रश्नपत्र लाई थी, जिसमें मामले से संबंधित सवाल थे। इसका लिखित जवाब प्राचार्य, शिक्षकों और कर्मचारियों को देना था। परीक्षा से पहले जांच टीम ने सभी से कहा कि कुछ देर को भूल जाएं कि वे प्राचार्य, शिक्षक या कर्मचारी हैं।
प्राचार्य, छह शिक्षकों, तीन लिपिकों और एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को एक परीक्षा कक्ष में बैठाया गया। सभी को एक क्लास रूम में ठीक उसी तरह से दूर-दूर बैठाया गया जैसे कि परीक्षार्थियों को बैठाया जाता था। इसके बाद करीब एक घंटे तक जांच कमेटी के सदस्यों ने सबसे अलग-अलग सवाल किए गए। सवाल घटनाक्रम से जुड़े हुए थे। इन्हीं जवाबों के जरिए जांच कमेटी ने निष्कर्ष निकालने का प्रयास किया।
कॉलेज में जांच के दौरान सपा से जुड़े कुछ लोग पहुंचे। वहीं छात्रा के परिजन भी पहुंचे। एहतियाती तौर पर कोतवाली पुलिस भी पहुंची। कोतवाली पुलिस ने निगरानी बनाए रखी। जांच टीम जब निकली तो पीड़ित छात्रा के परिजन को उनसे नहीं मिलने दिया गया। क्यों वह सवाल करना चाहते थे कि असिस्टेंट प्रोफेसर को अब तक निलंबित क्यों नहीं किया गया है
यह थी जांच टीम
डॉ. संध्यारानी, क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी - बरेली, डॉ. स्मिता जैन, राजकीय महिला महाविद्यालय की बदायूं की प्राचार्य, डॉ. मनीषा राव, रानी आवंती बाई लोधी राजकीय महिला महाविद्यालय बरेली की प्राचार्य