रामलाला ने पहने श्रद्धा के बने कपड़े
शहर की रहने वाली श्रद्धा खंडेलवाल के बनाए कपड़े अयोध्या में राम दरबार व मथुरा के बांके बिहारी मंदिर तक पहुंचे। श्रद्धा ने बताया कि उनके बनाए कपड़े रामलला को पहली बार में फिट आए। ये बात स्वयं मंदिर ट्रस्ट के लोगों बताई। ऐसा पहली बार हुआ कि रामलला को पहली बार में कोई वस्त्र पूरी तरह से फिट आए। उन्होंने बताया कि ये मेरे लिए एक बड़ी उपलब्धि रही है। अपने ऑनलाइन बिजनेस के माध्यम से शहर के बांके बिहारी व इस्कॉन मंदिर में भी भगवान को वस्त्र पहना चुकी हैं।
पीस कीपिंग ट्रूप का हिस्सा बनी बहादुरपुर की बहादुर बेटी
फरीदपुर के बहादुरपुर करोड़ गांव निवासी मीनाक्षी शर्मा अपने गांव से सेना में जाने वाली पहली बेटी हैं। इन दिनों सीएमपी (कॉर्प्स ऑफ मिलिट्री पुलिस) के पद पर कार्यरत हैं। वह तीन वर्षों तक पीस कीपिंग ट्रूप का हिस्सा बनकर इजरायल और सीरिया में शांति स्थापित करने में योगदान देकर लौटी हैं। मीनाक्षी ने बताया वह 2018 में बरेली कॉलेज से पासआउट होकर सेना में भर्ती हुई। पीस कीपिंग ट्रूप में प्रदेश की इकलौती महिला रहीं। मीनाक्षी ने बताया कि पिता को फेफड़ों का कैंसर है। अंतिम स्टेज होने की वजह से उनकी हालत ज्यादा खराब रहती है।
ऑटिज्म पीड़ित गरीब बच्चों को दे रहीं निशुल्क थेरेपी
शहर की रहने वाली क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट वैशाली रायजादा ने करीब पंद्रह सालों तक विशेष बच्चों के साथ काम किया। एक साल पहले उन्होंने पीलीभीत में अपना सेंटर खोला। यहां वह ऑटिज्म, एडीएचडी, इंटलेक्चुअल डिसेबिलिटी, डी-सिंड्रोम वाले जरूरतमंद बच्चों को निशुल्क थेरेपी दे रही हैं। बीते एक वर्ष में उन्होंने 15 ऐसे विशेष बच्चों की सहायता की है, जिनके परिजन महंगी थेरेपी दिलाने में असमर्थ थे। वैशाली ने बताया कि पहले वह जीवन धारा केंद्र से जुड़कर बच्चों को थेरेपी देने का कार्य कर रही थीं।
सरहद पर बलिदान पति को समर्पित की पुस्तक
बरेली कॉलेज के लाइब्रेरी साइंस विभाग की छात्रा रहीं शिवी के पति आशीष स्वामी शादी के पांच माह बाद ही सरहद पर देश की रक्षा करते हुए बलिदान हो गए। वह 58 राष्ट्रीय राइफल्स जम्मू में तैनात थे। पति की मौत के बाद शिवी टूट गईं, लेकिन रुकी नहीं। उन्होंने देश के प्रति अपने पति के प्रेम को जाया न जाने देने का प्रण लिया। शिवि ने बताया कि उनके अंदर हमेशा ही था कि मेरे बाद कोई मेरे देश भक्त पति को भूल न जाए इसलिए अपने अनुभवों को संजोने के लिए एक पुस्तक लिखी। पति की मृत्यु के करीब डेढ़ साल तक अवसाद से जूझते हुए ये किताब को पूरा करना उनके लिए प्रेरणा बनी। इस पुस्तक को खूब पसंद किया जा रहा है। शिवि ने बताया कि इटली और स्वीडन से भी इस पुस्तक के लिए आर्डर आ चुका है। इस किताब के माध्यम से लोगों में उन संवेदनाओं को सामने लाना चाहती थीं जो एक फौजी का परिवार महसूस करता है।