अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस आठ मार्च को है। इस मौके पर हम शहर की कुछ ऐसी चुनिंदा महिलाओं की कहानी लेकर आए हैं, जिन्होंने अपने जज्बे से सफलता की इबारत लिखी। मुश्किलों का सामना कर दूसरी महिलाओं के सामने उदाहरण प्रस्तुत किया। इसी श्रृंखला में पेश है पेट्रोल पंप पर काम करने वाली महिलाओं की संघर्ष गाथा उन्हीं की जुबानी...
बरेली के सिविल लाइंस स्थित पेट्रोल पंप पर काम करने वाली धर्मेश गोस्वामी ने बताया कि 2014 में दिल का दौरा पड़ने से पति की मौत हो गई तो समझ में नहीं आया क्या करूं। आठ साल की बेटी को पालने की चुनौती तो थी ही साथ ही उसकी पढ़ाई भी प्रभावित न हो यह भी ध्यान रखना था। फिर पेट्रोल पंप पर काम करना शुरू किया, आज बेटी अच्छे स्कूल में पढ़ रही है। बस यही ख्वाहिश है कि वह अच्छी इंसान बने।
प्रिया कश्यप मिनी बाईपास स्थित पेट्रोल पंप पर नौकरी करती हैं। उन्होंन बताया कि महिलाओं की खास आदत होती है कि जब तक चुनौती नहीं आती वह शांत रहती हैं। चुनौती आने पर वह डटकर सामना करती हैं। चार साल पहले पति की मौत हो गई। इसके बाद दो साल तो खुद को संभालने में लग गए। एक साल पहले रिश्तेदार के कहने पर पेट्रोल पंप पर काम करना शुरू किया। अब लगता है दुनिया मुट्ठी में है।