सट्टेबाज के खिलाफ कार्रवाई करने वाले इंस्पेक्टर के तबादले से सब हैरान
बरेली। महिला सट्टेबाज राबिया अख्तर को जेल भेजने वाले इंस्पेक्टर नरेश त्यागी को दूसरे दिन ही शहर के बारादरी थाने से हटाकर देहात के सिरौली थाने का इंस्पेक्टर बना दिया गया है। इसे लेकर तमाम तरह की चर्चाएं हैं। सिरौली इंस्पेक्टर को लाइन हाजिर किया गया है।
एसएसपी शैलेश पांडेय ने सोमवार आधी रात के बाद तीन इंस्पेक्टरों की तबादला सूची जारी की। दूसरे जिले से पुलिस लाइन में आमद कराने वाले इंस्पेक्टर शितांशु शर्मा को शहर के प्रमुख बारादरी थाने की कमान सौंपी है। यहां से नरेश त्यागी को हटाकर सिरौली इंस्पेक्टर बनाया गया है, जबकि सिरौली से राहुल सिंह लाइन हाजिर किए गए हैं। नरेश त्यागी के क्षेत्र में कुछ दिन पहले सचिन हत्याकांड हो गया था। बाइकर्स गैंग की फायरिंग की छत से वीडियो बना रहे सेल्समैन सचिन को बदमाशों ने सिर में गोली मार दी थी। आरोपियों में से एक इमरान महिला सट्टेबाज राबिया अख्तर का गुर्गा था। पुलिस पर सवाल इसलिए भी उठे कि जुआ-सट्टे का धंधा जिले में तेजी से पनप रहा था। इसमें शामिल किला थाने के पुलिसकर्मियों को एसएसपी ने निलंबित भी किया था। वहीं क्राइम ब्रांच के दागी स्टाफ की एएसपी जांच करा रहे हैं।
हालांकि इंस्पेक्टर नरेश त्यागी ने प्राथमिकता से सब खुलासे किए। उन्होंने सचिन हत्याकांड के आरोपियों को जेल भेजने के साथ ही महिला सट्टेबाज राबिया अख्तर की भी गिरफ्तारी कर ली। चर्चा है कि पुलिस सिस्टम को अपने इशारों पर नचाने वाली राबिया की गिरफ्तारी से बड़े सट्टेबाजों के साथ ही उनके सरपरस्त सकते में आ गए। कई सफेदपोशों ने राबिया को छोड़ने के लिए बड़े ऑफर दिए पर इंस्पेक्टर ने कदम पीछे नहीं खींचे। राबिया को जेल भेजने के दूसरे दिन ही नरेश त्यागी के ट्रांसफर से पुलिस विभाग को लेकर जनता में गलत संदेश गया है।
सफेदपोशों के करीबी सट्टेबाजों को घेरते ही फंसती है पुलिस
यह पुरानी रवायत जैसा हो गया है कि सफेदपोशों तक पहुंच रखने वाले बड़े सट्टेबाजों पर कार्रवाई होते ही संबंधित पुलिस वाले नप जाते हैं। हाल ही में बदायूं में भी चौधरी सराय में दबिश देकर सरकारीगंज चौकी प्रभारी राजीव राठी ने एक चर्चित सट्टेबाज को पकड़ लिया था। उसे छुड़वाने के लिए राठी पर खासा दबाव रहा पर उन्होंने उसे जेल भेज दिया। इस घटनाक्रम के बाद राठी को लाइन हाजिर कर दिया गया।
पूर्व मंत्री के निशाने पर थे राहुल सिंह
सिरौली इंस्पेक्टर राहुल सिंह कुछ समय से क्षेत्र के प्रभावशाली पूर्व मंत्री के निशाने पर थे। फिलहाल बच्चे का गुप्तांग काटकर की गई हत्या के मामले का वह खुलासा नहीं कर सके थे। इसके अलावा गांव में हथियार लेकर आरोपी की तलाश करने वाले केसरपुर की प्रधान के पति को सेफ करने में आरोपित हो गए थे। हालांकि बाद में उन्होंने प्रधान के पति के खिलाफ कार्रवाई भी की। इस बीच पूर्व मंत्री ने उनकी शिकायत पुलिस के उच्चाधिकारियों से की थी। माना जा रहा है कि राहुल सिंह को इसी नाराजगी का खामियाजा भुगतना पड़ा।
सिरौली में सात इंस्पेक्टर हो चुके हैं लाइनहाजिर
सिरौली। भाजपा सरकार आने के बाद तीन साल से सिरौली थाना किसी इंस्पेक्टर को मुफीद साबित नहीं हो सका है। प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद यहां तैनात इंस्पेक्टर को एक मई, 2017 को गांव मुगलपुरा में हुए दुष्कर्म के मामले में एक व्यक्ति को जबरन फंसाने पर लाइनहाजिर किया गया। इसके बाद इंस्पेक्टर गजेंद्र त्यागी जबरन वसूली के मामले में लाइन हाजिर हुए। मुकेश शर्मा को पूर्व मंत्री की नाराजगी के चलते लाइन भेजा गया। इसके बाद रामौतार यादव गांव अंजनी के युवक पर फर्जी अफीम दिखाकर वसूली करने में सस्पेंड हुए। सोमप्रकाश को गांव बसंतपुर में एक लड़की के अपहरण के मामले में लापरवाही बरतने पर सस्पेंड किया गया। इंस्पेक्टर संजय गर्ग भी भाजपा नेताओं से पंगा लेने पर लाइन भेजे गए। अब राहुल सिंह लाइन हाजिर हुए हैं।