स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की उदासीनता के कारण तीन सौ बेड अस्पताल में स्थापित ऑक्सीजन प्लांट का सेंसर कई माह से खराब पड़ा है। प्रभारी सीएमएस द्वारा उच्चाधिकारियों को कई बार पत्राचार के बावजूद इसकी मरम्मत नहीं हो सकी है, जिससे प्लांट की उपयोगिता पर सवाल उठ रहे हैं।
कोविड काल के दौरान ऑक्सीजन की कमी दूर करने के लिए एक हजार लीटर क्षमता का यह प्लांट स्थापित किया गया था। हालांकि, अस्पताल का संचालन कई सालों से लटका है, जहां गंभीर मरीजों के लिए न आईसीयू है और न ही डॉक्टरों की तैनाती। प्रभारी सीएमएस डॉ. इंतजार हुसैन ने बताया कि सेंसर सही कराने के लिए अस्पताल का अपना कोई स्वतंत्र बजट नहीं है और वे कई बार पत्राचार कर चुके हैं। वर्तमान में यहां केवल फिजिशियन, आंख और त्वचा रोग की ओपीडी तथा एंटी रैबीज वैक्सीन लगाई जाती है। दूसरी ओर, जिला महिला अस्पताल में पांच सौ एलपीएम क्षमता का ऑक्सीजन प्लांट क्रियाशील मिला। सीएमएस डॉ. त्रिभुवन प्रसाद ने बताया कि उनका प्लांट सही है और तकनीकी खामी होने पर उसे तुरंत ठीक करा दिया जाता है। जिला अस्पताल में भी दो साल पहले लगाया गया लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन (एलएमओ) प्लांट सुचारु रूप से काम कर रहा है।
मानव संसाधन की कमी और उपयोगिता पर सवाल
तीन सौ बेड अस्पताल का निर्माण बरेली मंडल के मरीजों के लाभ के लिए हुआ था, लेकिन यहां मानव संसाधनों की भारी कमी है। स्थायी डॉक्टरों की तैनाती की मांग शासन स्तर पर कई साल से उठाई जा रही है, पर अभी तक सफलता नहीं मिली है। जब तक मरीजों को भर्ती करने की सुविधा शुरू नहीं होगी, तब तक ऑक्सीजन प्लांट जैसी सुविधाओं की उपयोगिता पर सवाल बने रहेंगे। स्वास्थ्य विभाग के पास 50 से अधिक ऑक्सीजन कंसंट्रेटर भी हैं, जिनकी गुणवत्ता छह-छह माह में परखी जाती है।