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कोरोना के दौर में 171 फीसदी बढ़ी प्रॉपर्टी की खरीद-फरोख्त

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रुपये (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : demo photo
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पिछले साल 9610 रजिस्ट्री हुई थीं, इस साल तीन महीने में ही 16476
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अफसरों के मुताबिक सर्किल रेट न बढ़ने से लोग कर रहे हैं प्रॉपर्टी में निवेश

बरेली। इस साल लॉकडाउन में संपत्ति की खरीद-फरोख्त इतनी तेजी से बढ़ी कि रजिस्ट्री विभाग के अफसर भी हैरान हैं। आंकड़े बता रहे हैं कि पिछले साल कृषि, भवन, आवासीय समेत विभिन्न श्रेणियों में 9610 रजिस्ट्री हुई थीं जबकि इस साल अब तक 16476 रजिस्ट्री हो चुकी है। रजिस्ट्री विभाग की आय में 16 प्रतिशत की वृद्धि रिकॉर्ड की गई है। माना जा रहा है कि करीब साल भर से सर्किल रेट न बढ़ने की वजह से लोगों ने महामारी के दौरान प्रॉपर्टी में ज्यादा निवेश किया है।
कोरोना की पहली और दूसरी लहर में लॉकडाउन के बावजूद रजिस्ट्री ऑफिस पाबंदियों से काफी हद तक मुक्त रहा लिहाजा संपत्ति की खरीद-फरोख्त जारी रही। विभाग के मुताबिक पहले जहां हर दिन करीब सौ रजिस्ट्री होती थी वहीं इस साल यह आंकड़ा डेढ़ सौ से ज्यादा जा पहुंचा। रजिस्ट्री ऑफिस को पिछले पूरे साल में स्टांप और निबंधन शुल्क के तौर पर करीब 35.39 करोड़ की आय हुई थी, वहीं इस साल महज तीन माह में करीब 68.39 करोड़ की आय हुई है।
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अफसरों का मानना है कि अगर सर्किल रेट बढ़ गए होते तो यह आय और ज्यादा होती। बताते हैं कि अबकी बार रजिस्ट्री की तादाद तो बढ़ी है लेकिन 50 लाख से ज्यादा की रजिस्ट्रियों तादाद बेहद कम है। 15 से 40 लाख के बीच मूल्य की संपत्ति की सर्वाधिक खरीद-फरोख्त की गई है।

सर्वाधिक रजिस्ट्री प्लॉटों की

रजिस्ट्री विभाग के आंकड़ों के मुताबिक इस साल आवासीय प्लॉट की सबसे ज्यादा रजिस्ट्री हुई है। कहा जा रहा है कि चूंकि कोरोना से मध्यम वर्गीय परिवार सर्वाधिक प्रभावित हुए हैं। तमाम लोगों के रोजगार बंद हुए तो कइयों की नौकरी चली गई। लिहाजा जमापूंजी से वह छोटे-छोटे प्लॉट लेकर पूंजी बनाने की कवायद में जुट गए हैं ताकि कोरोना महामारी में अगर कोई संकट आए तो भविष्य में इस संपत्ति का उपयोग कर सकें।

ताकि सर्किल रेट बढ़े तो मिले मुनाफा

कोरोना की वजह से सर्किल रेट करीब दो साल से नहीं बढ़े हैं। ऐसे में जमापूंजी का संपत्ति में निवेश करना बेहतर विकल्प माना जा रहा है। भविष्य में कोरोना थमने के बाद सर्किल रेट में अच्छी खासी बढ़त होने की संभावना जताई जा रही है। इसलिए जरूरतमंद और निवेश करने वाले तेजी से आगे आ रहे हैं। कोरोना से प्रभावित लोगों के भी जमीन बेचने की बात कही जा रही है।

पहले इकरारनामा, अब कराई रजिस्ट्री

अफसरों का मानना है कि तीन माह में ही बड़ी तादाद में संपत्ति की खरीद-फरोख्त अचानक नहीं की गई है। पिछले साल मार्च से जून तक लॉकडाउन रहा। ऑनलाइन आवेदन और ऑनलाइन स्टांप बिक्री की व्यवस्था से भी कई लोग प्रभावित रहे। कई परिवार कोरोना की चपेट में भी आए तो रजिस्ट्री नहीं करा सके लेकिन इकरारनामा हो चुका था। ऐसे लोगों ने इस बार रजिस्ट्री कराई है।

जून के बैनामों का श्रेणीवार विवरण

कार्यालय का नाम कृषि आवासीय औद्योगिक भवन प्राधिकरण
उपनिबंधक बरेली प्रथम 192 910 30 162 16
उपनिबंधक बरेली द्वितीय 141 768 0 212 8
उपनिबंधक बहेड़ी 456 134 0 23 0
उपनिबंधक आंवला 455 135 4 5 0
उपनिबंधक फरीदपुर 367 292 7 22 0
उपनिबंधक नवाबगंज 307 221 3 16 0
उपनिबंधक मीरगंज 277 133 0 9 0
नोट: साल 2021 जून में 5305 रजिस्ट्री, साल 2020 में जून में 3040 रजिस्ट्री हुई थी।

कार्यालयवार वित्तीय वर्ष के आंकड़े

2020-21 (12 माह) 2021-22 (तीन माह)
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1716 3283
1729 3094
1155 2071
1345 2212
1277 2206
1371 2153
1017 1457
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9610 16476
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पिछले साल की अपेक्षा इस साल रजिस्ट्री अधिक हुई हैं। छोटे प्लॉटों की खरीद फरोख्त होने से आय करीब 16 फीसदी ज्यादा हुई है। सर्किल रेट न बढ़ना और प्रॉपर्टी में निवेश करने की चाहत, इसकी वजह हो सकती है। कोरोना महामारी के चलते लोग प्रॉपर्टी बेच रहे हैं, ऐसा नहीं है। - एसबी सिंह, एआईजी स्टांप

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