बहेड़ी। गांव उतरसिया महोलिया में बुधवार को खाने बनाते वक्त छप्पर में आग लग गई थी। छप्पर जलता देख परिवार को सभी सदस्य अपनी जान बचाने के लिए बाहर की ओर भागे। इस दौरान मची भगदड़ में बच्ची अलिस्मा भीतर ही छूट गई।
गांव उतरसिया महोलिया निवासी दिलशाद गांव के बाहरी छोर पर झोंपड़ी में परिवार के साथ रहते हैं। बुधवार अपराह्न करीब दो बजे जब दिलशाद की पत्नी खाना बना रही थी तो अचानक से छप्पर जलने लगा। बताते हैं कि हादसे के वक्त दिलशाद की पत्नी सहित घर में चार बच्चे थे। तीन बच्चे खेल रहे थे, जबकि चार साल की अलिस्मा चारपाई पर सो रही थी।
आग लगते ही सभी अपनी जान बचाने के लिए बाहर की ओर चीखते हुए भागे। जब तक दिलशाद की पत्नी को बेटी अलिस्मा की सुध आई काफी देर हो चुकी थी। छप्पर में पड़ी बल्ली और जलता घासफूंस झोंपड़ीं में नीचे गिरने लगा। आग ने चारपाई पर सोई अलिस्मा को भी अपनी चपेट में ले लिया। कुछ ही देर में अलिस्मा ने तड़पते हुए प्राण त्याग दिए। माता-पिता दोनों ने गमगीन हैं। वहीं राजस्व विभाग की टीम और पुलिस आग लगने का कारण जानने में जुटी है।
सब कुछ जलकर हो गया खाक
पुलिस और फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंच गई। फायर ब्रिगेड ने आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक मासूम जिंदा जल चुकी थी। आग लगने से घर में रखा सारा सामान भी जल गया। सूचना मिलते ही एसडीएम रत्निका श्रीवास्तव, तहसीलदार भानु प्रताप राजस्व टीम के साथ मौके पर पहुंचे। लोगों से घटना की जानकारी ली।
छप्पर के दो घरों में आग लगने से नुकसान हुआ है। एक बच्ची की मौत हो गई है। जांच कराई जा रही है। हालांकि लोगों का कहना है कि आग खाना बनाते वक्त लगी। पीड़ित परिवार की हर संभव मदद की जाएगी। -रत्निका श्रीवास्तव, एसडीएम, बहेड़ी
अग्निशमन कर्मियों ने हरी टहनियों से पीट-पीटकर बुझाई आग
बहेड़ी। मौसम के तेवर तीखे होते ही अब आग लगने की घटनाओं में इजाफा होने लगा है। पीलीभीत जनपद के सीमावर्ती गांव उतरसिया महोलिया में एक गरीब की झोंपड़ी में लगी आग में जलकर चार साल की मासूम जिंदगी की जंग हार गई तो लगभग उसी समय रिछा कस्बे के पास एक खेत में कटे गेहूं की नरई में आग लग गई।
सूचना पर फायर स्टेशन प्रभारी योगेश कुमार फायर टैंकर के बिना ही टीम के साथ मौके पर पहुंचे और बाल्टियों में तालाब के पानी और पेड़ों की हरी टहनियों से पीट-पीटकर आग पर काबू पाया। फायर स्टेशन प्रभारी योगेश कुमार ने बताया कि उनके यहां महज दो फायर टैंकर हैं, जिनमें से एक उतरसिया महोलिया गांव की घटना में और दूसरा महानगर में हुए एक अग्निकांड में मदद के लिए भेजा गया था। यही वजह रही है टीम सदस्यों के हौसले से वैकल्पिक संसाधनों से आग बुझाने को मजबूर होना पड़ा। संवाद
बहेड़ी। उतरसिया मोहलिया गांव में इसी झोपड़ी की आग में जिंदा जल गई बच्ची
बहेड़ी। उतरसिया मोहलिया गांव में इसी झोपड़ी की आग में जिंदा जल गई बच्ची
बहेड़ी। उतरसिया मोहलिया गांव में इसी झोपड़ी की आग में जिंदा जल गई बच्ची