जांच ही होती रही और आरोपियों को मिल गई जमानत
किसान संतोष शर्मा हत्याकांड जिले में खासा चर्चित हुआ था। बीते वर्ष 10 नवंबर 2023 को हुई इस घटना के मामले में सरदार नगर चौकी इंचार्ज टिंकू कुमार, दरोगा नेपाल सिंह, सिपाही दीपक, मनोज, पुष्पेंद्र और अंकित आरोपी बने थे। इन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने पर भी पुलिस आंखमिचौली खेलती रही। हत्याकांड जैसे संवेदनशील मामले में भी अपनों की गर्दन बचाने के लिए कछुआ चाल से विवेचना हुई। इस बीच आरोपी बचने के लिए पैरवी करते रहे।
मृतक के भाई ने पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े किए तो हत्यारे पुलिसवालों की गिरफ्तारी के लिए दबाव बढ़ गया। संतोष के भाई ने पैरवी कर कोर्ट से आरोपियों के गैर जमानती वारंट करा दिए। इसके बावजूद उनकी गिरफ्तारी नहीं हुई और आरोपियों ने कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस की ढुलमुल जांच के कारण ही छह आरोपियों को आसानी से जमानत मिल गई। अब मृतक का भाई पुलिस पर अपनों को बचाने का आरोप लगा रहा है।
दुष्कर्म की रिपोर्ट पर भी नहीं पकड़े गए
शहर में पहले तैनात रहे एक दरोगा और पुलिस लाइन में तैनात सिपाही के खिलाफ बीते महीने 14 मार्च को दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज हुई थी। एडीजी से एक युवती ने शिकायत की थी कि स्टेशन चौकी इंचार्ज रहे व इन दिनों पीलीभीत में तैनात दरोगा सिद्धांत शर्मा से उसकी दोस्ती हो गई थी। दरोगा ने फ्लैट पर बुलाकर दुष्कर्म किया और अश्लील फोटो वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने लगा। दरोगा के खिलाफ कोतवाली में रिपोर्ट तो दर्ज हुई लेकिन गिरफ्तारी की कोशिश नहीं की गई। वहीं सीतापुर की एक युवती ने बरेली पुलिस लाइन में तैनात सिपाही नितिन पर शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था। सिपाही के खिलाफ भी कोतवाली में रिपोर्ट तो दर्ज हुई लेकिन आगे की कार्रवाई अब तक नहीं हो सकी।
एसएसपी घुले सुशील चंद्रभान ने बताया कि दरअसल सुप्रीम कोर्ट की रूलिंग के तहत सात साल से कम सजा के मामलों में गिरफ्तारी न करने का प्रावधान है। यही व्यवस्था पुलिसकर्मियों पर दर्ज मामलों में भी प्रभावी होती है। बाकी मामलों में पुलिसकर्मियों की भी गिरफ्तारी होती है, उनके लिए कोई विशेष प्रावधान नहीं है।