बीमारी से पीड़ित जानवरों को किया गया आइसोलेट, मृत हिरनों की हो रही हिस्टोपैथोलॉजी जांच
बरेली। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) इज्जतनगर में चार गोवंशीय पशु खुरपका मुंहपका रोग (एफएमडी) की चपेट में मिले हैं। जिसकी जानकारी होते ही आईवीआरआई में बायो सेफ्टी रूल्स लागू कर दिया गया है। उधर, एक हिरनी की गर्भ में पल रहे एक बच्चे समेत एक बूढ़े हिरन की मौत हो गई। मौत की वजह जानने के लिए हिरनों की हिस्टोपैथोलॉजी जांच कराई जा रही है।
आईवीआरआई निदेशक डॉ. त्रिवेणी दत्त के मुताबिक, एफएमडी पीड़ित चारों पशुओं को तत्काल आइसोलेट कर इलाज शुरू हो गया है। बताया कि आईवीआरआई के फार्मों में जो भी पशु हैं, सभी को रोग से बचाने के लिए वैक्सीन लगाई जा चुकी है मगर, गर्भवती जानवर और उनके बच्चों को वैक्सीन नहीं लगाई जाती है। आशंका जताई है कि इनसे ही बीमारी फैली है। लिहाजा फार्म में बायो सेफ्टी रूल्स लागू कर दिए गए हैं। प्रभावित क्षेत्र में रोग निरोधक दवाओं का स्प्रे कराया गया है। मार्ग पर चूने का छिड़काव कराया गया है। बगैर अनुमति आवागमन प्रतिबंध है।
उधर, आईवीआरआई परिसर स्थित डियर फार्म में पिछले दिनों दो हिरन की मौत हुई है। बताया जा रहा है कि एक गर्भवती हिरनी किन्हीं कारणों से चोटिल हो गई थी। इससे गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत हो गई। एक बूढ़े हिरन की भी मौत हुई है। कमजोर होने की वजह से वह उठ नहीं पा रहा था। अन्य हिरन उसे उठने में मदद कर रहे थे। इसी दौरान अंदरूनी चोट लगना मौत की वजह मानी जा रहा है।
जांच में सामने आएगा मौत का सच
हिरन की मौत के बाद उनका पोस्टमार्टम किया गया पर पोस्टमार्टम की रिपोर्ट में मौत की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है। लिहाजा, हिस्टोपैथोलॉजी जांच कराई जा रही है। आईवीआरआई निदेशक डॉ. दत्त ने बताया कि इस जांच में मौत की वजह पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी। रिपोर्ट आने में दो से तीन तक का समय लग सकता है। बता दें कि डियर फार्म की ओर आवागमन पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। चेतावनी बोर्ड भी लगा है।
आईवीआरआई में हिरन पार्क की ओर जाने वाले रास्ते पर लगा प्रतिबंध।