भाग्यवती ने बताया कि अवर न्यायालय ने मनमाने ढंग से वाद को खारिज कर दिया है। जनवरी 2019 में प्रेमपाल ने राम दुलारे के नाम से एक फर्जी पॉवर ऑफ एटॉर्नी तैयार कर उसकी कृषि भूमि को अपने नाम करा लिया गया। इसके बाद 55 लाख में बैनामा ओमप्रकाश को कर दिया गया। भाग्यवती ने कहा कि अवर न्यायालय ने इन तथ्यों की उपेक्षा की थी। 2024 में न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनने और तथ्यों का अवलोकन करने के बाद पुनरीक्षण याचिका स्वीकार कर ली थी।
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अब अपर सत्र न्यायालय ने डीएम को आदेश दिया है कि निबंधन कार्यालय से पॉवर आफ अटार्नी की जांच कराई जाए। पीड़ित ने कहा कि पॉवर आफ अटार्नी फर्जी है। कोर्ट ने सवाल उठाया सरकारी दर पर उस जमीन की कीमत 1.54 करोड़ रुपये है तो उसकी रजिस्ट्री 55 लाख में कैसे हो गई। कोर्ट ने कहा कि मृतक की जमीन पर कब्जा करने के लिए 12 लाख रुपये ऋण लेने का आरोप लगाया गया।
कोर्ट की टिप्पणी
कोर्ट ने कहा कि यह परिस्थितियां गंभीर संगठित आपराधिक गिरोह के सुनियोजित षड़यंत्र का पर्दाफाश कर रही है। इसके तहत किसी निर्धन व दुर्बल वर्ग के व्यक्ति पर मौखिक रूप से ऋण का आरोप लगाकर उसकी अचल संपत्ति को उक्त अभिलेखों के माध्यम से अपने नाम कर लिया गया। कहा कि राम दुलारे ने उस दौरान के बयान में उसकी संपत्ति हड़पने की आशंका व्यक्त की थी। जोकि वाद में सत्य सिद्ध हुई है। अवर न्यायालय द्वारा दिया गया आदेश विधिसंगत नहीं है।