बरेली। पाैधरोपण के बाद उनके रखरखाव में जमकर लापरवाही होती है। ग्राम्य विकास विभाग के पौधरोपण अभियान की जांच में यह हकीकत सामने आई है। विधानसभा के शीतकालीन सत्र में पेश सीएजी रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि ग्राम्य विकास विभाग ने बरेली व लखीमपुर खीरी क्षेत्र में वर्ष 2016-17 से 2021-22 तक जो पौधे रोपे, उनमें से आधे से ज्यादा नष्ट हो गए। इससे करीब नाै करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
14.03 रुपये की दर से बरेली में पौधरोपण किया गया। इनमें से 44.71 प्रतिशत पाैधे ही चले। करीब 55 फीसदी पौधे सूख गए। वहीं, लखीमपुर खीरी में 10.78 रुपये की दर से पौधे लगाए गए। इनमें से महज 21.24 प्रतिशत पाैधे ही जीवित रहे। करीब 79 फीसदी पौधे नष्ट हो गए। इस वजह से बरेली में 2.33 करोड़ और लखीमपुर खीरी में सात करोड़ रुपये से अधिक खर्च बेकार गया।
रोपे गए पौधों के खराब होने का पहला कारण पौधों के रखरखाव की कमी थी। कंपोस्ट खाद और कीटनाशकों का उपयोग नहीं किया गया। न ही उनका संरक्षण किया गया। समय पर पानी भी नहीं दिया गया। लेखा परीक्षक की इस आपत्ति को विभाग ने स्वीकार भी किया और कहा कि वन विभाग द्वारा कम गुणवत्ता वाले पौधों की आपूर्ति और रखरखाव की कमी के कारण ऐसा हुआ। इस पर लेखा विभाग ने कहा कि यदि वन विभाग ने कम गुणवत्ता वाले पौधों की आपूर्ति की थी, तो इसका समाधान किया जाना चाहिए था, क्योंकि पाैधरोपण की सफलता को सुनिश्चित करना ग्राम्य विकास विभाग की जिम्मेदारी थी। अमर उजाला ब्यूरो