चिकन के शौकीन लोगों में बर्ड फ्लू का खौफ दिखने लगने लगा है। इसके चलते चिकन की बिक्री घटकर सिर्फ 30 फीसदी रह गई है। वहीं, अन्य प्रकार के मांस की बिक्री में 20 प्रतिशत तक इजाफा हुआ है। मगर होटलों में चिकन खाने के शौकीन अब भी पहुंच रहे हैं।
आम दिनों में प्रतिदिन लगभग पांच टन चिकन की खपत होती थी, जिसकी की कीमत लगभग 9 लाख रुपये होती है। अब यह बिक्री दो टन से भी कम हो गई है। मांग घटने से इसकी कीमत भी गिरी है। एक सप्ताह पहले 180 रुपये किलो बिकने वाला चिकन अब 120 रुपये किलो बिक रहा है। मगर होटलों में चिकन की मांग पर अभी कोई फर्क नहीं पड़ा है। हालांकि कुछ इलाकों में इसके 60 रुपये किलो तक बिकने की बताई कही जा रही है लेकिन इसकी कोई पुष्टि नहीं हुई। वहीं, चिकन की बिक्री घटने से मटन समेत अन्य मांस की मांग 20 प्रतिशत तक बढ़ गई है।
मांस व्यापारियों की बात..
- मीट व्यापारी मोहम्मद मुस्तकीम का कहना है कि अभी तमाम लोग जागरूक नहीं हैं और वे चिकन खा रहे हैं। मगर इसकी मांग जरूर कम हुई और इसकी वजह से दूसरे मांस की बिक्री 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ गई है।
- होटल स्वामी मोहम्मद शादाब का कहना है कि अभी चिकन की मांग पर कोई खास असर नहीं है। लोग आ रहे हैं और चिकिन, मटन समेत सभी मांस खा रहे हैं। दो-तीन दिन ग्राहक कुछ कम आए लेकिन ये मौसम का असर था।
मांसाहार से है प्यार तो फिलहाल कर दीजिए इनकार
देश के कई राज्यों में बर्ड फ्लू ने दस्तक दे दी है। राहत बस इतनी है कि अभी कोई इंसान इसकी चपेट में नहीं आया है। चिकित्सकों ने का कहना है कि अगर कोई इंसान बर्ड फ्लू से ग्रसित मिला तो यह महामारी बन सकता है इसलिए मांसाहार और अंडा खाने वाले लोग फिलहाल इनसे दूर ही रहें।
मृत पक्षियों से रहें दूर
वायरोलॉजिस्ट डॉ. राहुल गोयल ने बताया कि इस फ्लू से प्रभावित पक्षी के यूरिन या स्टूल (पेशाब या मल) के संपर्क में आने से यह वायरस इंसान तक पहुंच सकता है क्योंकि यह संक्रामक बीमारी है। इसलिए अगर इन दिनों कहीं पर कोई पक्षी मरा हुआ दिखे तो उससे दूर रहें क्योंकि उसके संपर्क में आने से संक्रमण हो सकता है। बताया कि राजस्थान में जो पक्षी मरे पाए गए हैं, उनमें से कई में एच5एन1 स्ट्रेन मिला है। अभी और रिपोर्ट आना बाकी हैं।
वायरस चिकन में पहुंचा तो स्थिति भयावह
चिकित्सकों के मुताबिक यह वायरस अभी कुछ राज्यों तक ही सीमित है, जिसे रोकना जरूरी है। वरना यह महामारी की तरह फैलता जाएगा। अगर यह सक्रमण चिकन में पहुंच गया तो सबसे ज्यादा खतरा होगा क्योंकि मांसाहार के शौकीन लोगों में चिकन सबसे ज्यादा खाया जाता है। कई जगह तो चिकन को बिना पूरी तरह से पकाए यानी रोस्टेड भी खाया जाता है, इसलिए खतरा बढ़ सकता है। बताया कि पक्षियों में इस बीमारी का इलाज नहीं है, लेकिन इंसान के लिए एंटी वायरल दवा है और समय पर यह जांच में आ जाए तो इलाज संभव है।
बर्ड फ्लू के लक्षण
खांसी, जुकाम, थकान, मांसपेशी में दर्द, गले में सूजन, दस्त होना, सांस में दिक्कत होना।
कैसे बचें
- संक्रमित पक्षियों से दूर रहें, मरे पक्षियों को छूने से बचें।
- मांसाहार खरीदते समय साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दें।
- जहां पक्षी संक्रमित हों वहां बगैर एन95 मास्क के न जाएं।
- नॉनवेज कच्चा न खाएं, 160-165 डिग्री तक इसे पकाएं।
बर्ड फ्लू को लेकर अलर्ट, पोल्ट्री फार्म का रोजाना निरीक्षण के निर्देश
बर्ड फ्लू के बढ़ते खतरे के मद्देनजर पशु पालन विभाग ने अलर्ट जारी किया है। इसके चलते मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ललित कुमार वर्मा ने पशु चिकित्साधिकारियों को पोल्ट्री फ ार्म का रोजाना निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने बताया कि कुक्कुट पालकों को बायो सिक्योरिटी योजना से जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही पोल्ट्री फ ार्म संचालकों को अंडों और मुर्गियों का परिवहन खुले में न करने की हिदायत दी गई है। बर्ड फ्लू के खतरे को देखते हुए अलर्ट जारी कर सभी पशु चिकित्साधिकारियों को प्रतिदिन पोल्ट्री फार्म का निरीक्षण करने के साथ ही पक्षियों पर निगाह रखने को कहा गया है। हर दिन इसकी रिपोर्ट ली जाएगी। कहीं कोई बीमारी मिलने पर उसके सैंपल लेकर जांच को भेजे जाएंगे। उन्होंने लोगों से अपील की है कि कहीं किसी पक्षी के मरने पर उसकी जानकारी पशु पालन विभाग को दें और मृत पक्षी को हाथ से न लगाएं। ब्यूरो
बाहरी पक्षियों की आमद रोकने में जुटा सीएआरआई
बर्ड फ्लू के खतरे को देखते हुए केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान (सीएआरआई) बचाव के व्यापक उपाय करने में जुटा है। संस्थान ने न केवल अपने करीब 40 हजार पक्षियों को संक्रमण से बचाने के प्रयास तेज कर दिए हैं, बल्कि बाहरी पक्षियों की आमद रोकने की भी कवायद की जा रही है। इसके लिए सीएआरआई परिसर में लगे पेड़ों की उन टहनियों को छंटवाया जा रहा है, जो सड़कों के ऊपर आ रही हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि इन टहनियों पर बाहर से आकर बैठने वाले पक्षियों की बीट सड़क पर गिरती है, इससे संक्रमण फैल सकता है।
पोल्ट्री फार्म संचालकों को भी सतर्क रहने की हिदायत
बर्ड फ्लू के खतरे को देखते हुए सीएआरआई के वैज्ञानिकों ने पोल्ट्री फार्म संचालकों को भी सतर्कता बरतने की हिदायत दी है। उनसे कहा है कि वे अपने फार्म में मुर्गियों और चूजों को बाहरी पक्षियों के संपर्क से दूर रखें। किसी तरह की लापरवाही न बरतें।
बर्ड फ्लू के खतरे को हुए सीएआरआई लगातार सतर्कता बरत रहा है। इसके लिए पोल्ट्री फार्म संचालकों को भी निर्देश दिए जा रहे हैं कि वे बाहरी पक्षियों को आने से रोककर संक्रमण के खतरे से बचाव कर सकते हैं। - डॉ. संजीव कुमार, निदेशक, सीएआरआई