बरेली के विकास भवन परिसर में अफसरों की नाक के नीचे पांच साल से अवैध वाहन स्टैंड संचालित होता रहा। संचालक वाहन चालकों से अवैध वसूली करता रहा। उसने कर्मचारियों को भी नहीं छोड़ा, पर अफसर अनजान बने रहे। मामला खुला तो जिला विकास अधिकारी (डीडीओ) ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि इसकी जानकारी उन्हें तीन दिन पहले मिली थी। इस पर स्टैंड संचालक को भगा दिया है। साथ ही, नाजिर से स्पष्टीकरण तलब किया है।
विकास भवन परिसर में वाहनों की सुरक्षा के लिहाज से तैनात होमगार्डों ने बताया कि वाहन स्टैंड वैध है या अवैध, इस बारे में उन्होंने कभी पता ही नहीं किया। कर्मचारियों के मुताबिक, विभिन्न जरूरत के मद्देनजर प्रत्येक कार्यदिवस में 400 से 500 लोग विभिन्न वाहनों से विकास भवन आते हैं। उनको इसी स्टैंड पर अपना वाहन खड़ा करना पड़ता है, क्योंकि स्टैंड पर मौजूद लोग उनको इधर-उधर वाहन खड़े नहीं करने देते हैं। इस अवैध स्टैंड से रोज चार से पांच हजार रुपये वसूली होती है।
हैरत की बात है कि इतना सब होने के बावजूद अधिकारियों को भनक कैसे नहीं लगी? नाजिर राजेश बाबू ने बताया कि पांच साल पहले ओम प्रकाश के नाम वाहन स्टैंड का ठेका हुआ था। उसकी सिक्योरिटी मनी के 50 हजार रुपये भी जमा हैं। ओम प्रकाश की मृत्यु के बाद छोटू नाम का व्यक्ति स्टैंड संचालित कर रहा था।
डीडीओ दिनेश यादव ने बताया कि पूर्व में कुछ गाड़ियां चोरी हो गई थीं तो एक व्यक्ति से कह दिया गया था की प्रति वाहन 10 रुपये शुल्क लेकर स्टैंड संचालित कर ले, लेकिन बाद में शिकायत आई तो उसे भगा दिया है। नाजिर से स्पष्टीकरण मांगा गया है।