बरेली। पाकिस्तानी जासूस इजाज के नेटवर्क में कई महिलाएं भी शामिल थीं। इजाज के कॉल डिटेल ने यह राज खोला है। इन महिलाओं से इजाज की लंबी बातचीत हुई है। इन महिलाओं का वह जासूसी में इस्तेमाल करता था या नहीं इसके लिए खुफिया एजेंसियां कुछ महिला दोस्तों से भी पूछताछ करेंगी। इजाज का एक साथी इरफान ढाका में है जिसके माध्यम से पाकिस्तानी जासूस सैन्य सूचनाएं पाक भेजता था।
करांची से अपने पासपोर्ट पर आए इजाज को बांग्लादेश की राजधानी ढाका में आईएसआई के एजेंट इरफान ने रिसीव किया था। इरफान ने ढाका में ही उसकी पाकिस्तानी पहचान को अपने पास रखकर कलाम नाम से भारत की सीमा में प्रवेश कराया। बेलापुर के पास से उसे भारत में प्रोवीन नाम के व्यक्ति ने नदी के रास्ते से प्रवेश कराया। कोलकाता मेें वह अपने गुरु इरशाद से मिला। इरशाद ने उसे हिंदी लिखना-पढ़ना सिखाने के बाद मिशन पर भेज दिया। बिहार के आरा जिले के अजीमाबाद गांव में आसमा के शादी करने के बाद इजाज का असली मिशन शुरू हुआ। उसने अपने फन के जरिए बरेली आकर लोगों को खुद से जोड़ लिया। लोगों की इसी कमजोरी का फायदा उठाकर इजाज सैन्य क्षेत्रों से संबंधित सूचनाएं जुटाता रहा। कुछ फोटोग्राफ उसने अपने करीबी फोटोग्राफरों के जरिए हासिल कर लिए। एसटीएफ के सूत्रों के मुताबिक वह सीधे आईएसआई के अधिकारी सलीम को सूचना नहीं देता था। ढाका में कैंप करने वाले आईएसआई के एजेंट इरफान के जरिये ही इजाज की सूचनाएं उसके पाकिस्तान में बैठे आका सलीम तक पहुंचती थीं। शहर में थाना सुभाषनगर इलाके में रहने वाली एक महिला समेत कई महिलाएं भी खुफिया एजेंसियों की रडार पर हैं।
आसमा जानती थी पाकिस्तानी है इजाज
बरेली में आने के बाद आसमा जान गई थी कि इजाज पाकिस्तान का रहने वाला है। हालांकि आसमा यह स्वीकार करने को तैयार नहीं हुई कि वह इजाज की असलियत जानती थीं।
इजाज घर में अक्सर पंजाबी बोलने लगता था। पाकिस्तानी टीवी चैनल भी वह देखने में दिलचस्पी लेता था। बरेली में शिफ्ट होने के बाद आसमा ने इजाज पर ज्यादा जोर दिया तो उसनेे एक दिन बता ही दिया था कि वह पाकिस्तानी नागरिक है। किसी तरह धोखे से बार्डर पार आ गया है। अब कोई दिक्कत नहीं होगी। उसके पास पश्चिमी बंगाल की आईडी पहले से ही थी। बिहार के अजीमाबाद भी बन गई है। दीवानखाना(शाहबाद) की आईडी से इजाज ने अपना आधार कार्ड बना लिया था।