इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन (आईआईपीए) के इलेक्शन में हुई धांधली को लेकर बैठक 16 जनवरी को दिल्ली में होगी। इसकी अध्यक्षता उपराष्ट्रपति डॉ. हामिद अंसारी करेंगे। दो वर्ष पहले हुए इलेक्शन में धांधली होने की आवाज बरेली के डॉ. एके चौहान और डॉ. मिथलेश मिश्रा ने उठाई थी।
आईआईपीए के एक्जीक्यूटिव काउंसिल का चुनाव हर तीन वर्षों में होता है। इसमें कुल 28 सदस्य होते हैं। अक्टूबर 2012 में आईआईपीए के चुनाव में धांधली हुई थी। आईआईपीए की बरेली ब्रांच के चेयरमैन डॉ. एके चौहान और सेक्रेेटरी डॉ. मिथलेश मिश्रा ने इस धांधली की शिकायत अध्यक्ष व उपराष्ट्रपति डॉ. हामिद अंसारी से की थी। इस आधार पर उपराष्ट्रपति ने 2013 में जांच के लिए तीन सदस्यीय हाई पॉवर कमेटी बना दी थी। इस कमेटी ने धांधली होने के आरोप सही पाए और अपनी जांच पूरी करके जनवरी 2014 में रिपोर्ट आईआईपीए के डायरेक्टर को सौंप दी। डायरेक्टर ने जांच रिपोर्ट अध्यक्ष व उपराष्ट्रपति के सामने पेश करने के बजाय उल्टे एक्जीक्यूटिव काउंसिल को ही भेज दी। चूंकि जांच रिपोर्ट एक्जीक्यूटिव काउंसिल के खिलाफ थी इसलिए इसे गलत करार देकर मामला दबा दिया गया। यहीं नहीं अक्टूबर 2014 की एजीएम में भी इस मामले को पेश नहीं किया गया।
इसके बाद डॉ. एके चौहान व डॉ. मिथलेश मिश्रा ने मामले की दुबारा शिकायत उपराष्ट्रपति से कर दी। इस पर उपराष्ट्रपति ने धांधली पर चर्चा करने और इसे रोकने के लिए 16 जनवरी को दिल्ली में सभी सदस्यों की बैठक बुलाई है। डॉ. चौहान ने इस बैठक की अध्यक्षता करने के लिए ई-मेल भेजकर उपराष्ट्रपति से अनुरोध किया था, जिसे स्वीकार कर लिया गया। आईआईपीए के अधिकांश पदों पर रिटायर आईएएस हैं। इसके अध्यक्ष उपराष्ट्रपति होने के बावजूद इस तरह की धांधली होना विचारणीय है।