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सामुदायिक संक्रमण रोकना है तो जाति-धर्म के भेदभाव पर लगाएं अंकुश

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मनमुटाव और भेदभाव को परे रखकर ही जीती जा सकती है कोरोना से जंग
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स्वास्थ्य सचिव बोले- सर्दी, खांसी, बुखार, सांस फूलने के मामलों को गंभीरता से लें

बरेली। संवेदनशील राज्यों से वापस आ रहे प्रवासी श्रमिकों की वजह से संक्रमण के फैलाव को रोकना अफसरों के लिए बड़ी चुनौती है। स्वास्थ्य सचिव ने विभागीय अफसरों को संक्रमण का फैलाव रोकने के लिए लोगों तक सही जानकारी पहुंचाने की जिम्मेदारी सौंपी है। लोगों के मन से कोरोना के डर और घबराहट दूर कर उन्हें इसका सामना करने के लिए जागरूक करने का सुझाव दिया है, ताकि वे स्वेच्छा से स्क्रीनिंग और सैंपलिंग कराएं। साथ ही, जाति-धर्म और संपत्ति के विवादों पर अंकुश लगाने की अपील की है।
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प्रदेश की स्वास्थ्य सचिव वी. हेकाली झिमोमी ने स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारियों को सुझाव दिया है कि कोविड-19 के दौर में समुदाय तक सही संदेश पहुंचाकर ही कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोका जा सकता है। उन्होंने फ्रंट लाइन वर्कर (आशा-आंगनबाड़ी वर्कर, एएनएम) को खुद का बचाव करते हुए घर-घर जाकर लोगों को संक्रमण से बचाव की जानकारी दने के लिए तैयार करने को कहा है। दूसरे राज्यों और जिलों से आ रहे प्रवासियों की निगरानी और ग्राम-मोहल्ला निगरानी समितियों के माध्यम से प्रवासियों को चिह्नित कर उन्हें क्वारंटीन करने के निर्देश दिए हैं। सीएमओ डॉ. विनीत शुक्ल ने बताया कि शासन की ओर से दिए जा रहे दिशा निर्देशों का अनुपालन कराया जा रहा है।

भेदभाव और मनमुटाव को दूर कर संक्रमण से बचें

गांवों में तमाम प्रवासी कई सालों बाद वापस लौटे हैं। ऐसी स्थिति में उनमें संपत्ति समेत जाति, धर्म के आधार पर भेदभाव की आशंका स्वास्थ्य सचिव ने जताई है। लिहाजा, उन्होंने कोरोना से चल रही जंग में फिलहाल मनमुटाव और भेदभाव से परे रहकर समाज की सुरक्षा के लिए एकजुट होकर कोरोना से मुकाबला करने का सुझाव दिया है। कहा है कि ऐसा वायरस है जो कभी भी और किसी को भी संक्रमित कर सकता है, इसके लिए किसी धर्म, जाति या संप्रदाय को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।
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