फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bareilly News: पैर होते तो दाैड़ते... हौसलों के पर से भर रहे उड़ान

विज्ञापन
विज्ञापन
बरेली। सपने को साकार करने के लिए मजबूत इरादों की जरूरत होती है। अटूट इच्छाशक्ति है हो तो शारीरिक सीमाएं भी सफलता की राह में बाधा नहीं बनतीं। शहर के पैरा खिलाड़ियों ने विपरीत समय में हार नहीं मानी और दृढ़ संकल्प के दम पर अपने हुनर को निखार खेल के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित किए। आइए, हम जानते हैं ऐसे खिलाड़ियों के बारे में जिन्होंने शारीरिक चुनौतियों को ताकत बनाते हुए हौसलों के पर से उड़ान भरी है।
विज्ञापन


दुर्घटना में एक पैर गंवाने के बाद भी इरफान ने नहीं हारी हिम्मत
पैरा खिलाड़ी इरफान बेग ने हाल ही में शहर में हुई यूपी स्टेट पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भाला फेंक और चक्का फेंक में स्वर्ण पदक जीतकर नाम रोशन किया। हालांकि, यह सफर उनके लिए आसान नहीं था। मार्च, 2016 में दिल्ली से लौटते समय कुछ लोगों ने उन्हें ट्रेन से धक्का दे दिया था। हादसे में गंभीर रूप से घायल होने के बाद उन्हें अपना एक पैर गंवाना पड़ा। इस दुर्घटना के बाद वह पूरी तरह से टूट गए। लेकिन, उनके परिजनों ने उनका हौसला बढ़ाया। पर्वतारोही अरुणिमा सिन्हा को प्रेरणा मानकर उन्होंने भाला फेंक और चक्का फेंक जैसे खेलों में हाथ आजमाया। टोक्यो ओलंपिक में स्वर्ण पदक विजेता नीरज चोपड़ा की सफलता के बाद इरफान पैरालंपिक खेलों की तैयारियों में जुट गए हैं।

पैर गंवाने के बाद मैदान में लगाए चौके-छक्के
वर्ष 2017 में ट्रेन हादसे का शिकार हुए पुराना शहर निवासी योगेश कुमार के जीवन में हुई दुर्घटना ने उन्हें पूरी तरह से झकझोर कर रख दिया था। हादसे के कारण उनका बायां पैर कट गया। तीन साल के इलाज और विश्राम के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और क्रिकेट के मैदान पर वापसी की। कृत्रिम पैर के माध्यम से उन्होंने वर्ष 2021 में दिव्यांग क्रिकेट प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और अपनी टीम को जीत दिलाई। इसके साथ ही वह, सेंट्रल जोन टी-20 पैरा क्रिकेट टूर्नामेंट, पैरा वर्ल्ड टी-10, अटल कप कानपुर जैसी प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग कर चुके हैं।
विज्ञापन

हाथ गंवाने के बाद, पैरों से साध रहे लक्ष्य
37 वर्ष के मनोज कुमार यादव बिना हाथों के ही लक्ष्य पर निशाना साधते हैं। खिलाड़ी शीतल देवी को अपना आदर्श मानने वाले मनोज शहर में बने राइफल क्लब में अभ्यास करते हैं। जब वह पैरों में धनुष को फंसाकर, कंधे और गर्दन के बीच तीर फंसाकर खींचते हैं तो, यह देखने योग्य होता है। वह बताते हैं कि छह वर्ष की उम्र में उनके ऊपर 11 हजार केवी की लाइन टूटकर गिर गई थी। इससे उनके दोनों हाथ बुरी तरह झुलस गए थे। उपचार के बाद उनकी जान तो बच गई, लेकिन उन्हें अपने दोनों हाथ गंवाने पड़े। तमाम कठिनाइयों के बाद भी उन्होंने एथलेटिक्स के खेल में कदम रखा और राष्ट्रीय के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। वर्तमान में वह बरेली में टेलीफोन ऑपरेटर के पद पर नियुक्त हैं। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें