How the character certificate was issued to the gangsters, investigation started
बरेली। शराब माफिया मनोज जायसवाल के चचेरे भाई दिलीप और विशाल पर शराब तस्करी और गैंगस्टर के मुकदमे होने के बावजूद उन्हें पुलिस विभाग से चरित्र प्रमाणपत्र जारी कर दिए जाने के मामले में एसएसपी ने जांच का आदेश दिया है। दोनों पर शराब की कई दुकानों के लाइसेंस हैं। इस मामले में पहले आबकारी विभाग पर सवाल उठ रहे थे मगर आबकारी उपायुक्त ने इसके लिए पुलिस-प्रशासन के अफसरों को जिम्मेदार ठहराया था।
अब तक कई मामलों में मनोज जायसवाल की पुलिस-प्रशासन के अफसरों के गैरकानूनी ढंग से मदद करने के मामले सामने आ चुके हैं। सौ करोड़ की टैक्स चोरी के खुलासे के बाद आबकारी विभाग की ओर से सील किए मनोज जायसवाल के डाउन टाउन बार की सील खुलवाने में सीधे तौर पर तत्कालीन डीएम मानवेंद्र सिंह की भूमिका सामने आई थी। इसके बाद खुलासा हुआ कि नवादा शेखान में रहने वाले मनोज के चचेरे भाई दिलीप और विशाल जायसवाल को शराब तस्करी और गैंगस्टर में नामजद होने के बावजूद उन्हें शराब की कई दुकानों का लाइसेंस दे दिया गया।
आबकारी विभाग पर सवाल उठे तो उसके अफसरों ने दो टूक यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि उन्होंने दिलीप और विशाल को चरित्र प्रमाणपत्र के आधार पर लाइसेंस दिए थे और चरित्र प्रमाणपत्र डीएम-एसएसपी जारी करते हैं। अब एसएसपी रोहित सिंह सजवाण ने दिलीप और विशाल को चरित्र प्रमाणपत्र जारी करने के मामले की जांच का आदेश दिया है।
दो बार होता है सत्यापन, बिना साठगांठ नहीं बन सकता अपराधी का प्रमाणपत्र : जिला आबकारी अधिकारी देव नारायण दुबे ने बताया कि चरित्र प्रमाणपत्र एसएसपी के एप्रूवल के बाद बनता है। आवेदक इस चरित्र प्रमाण पत्र को लाइसेंस के आवेदन के साथ दाखिल करता है। फीस जमा होने के बाद आबकारी विभाग एक बार फिर यह चरित्र प्रमाण पत्र सत्यापन के लिए पुलिस विभाग को भेजता है। दूसरे स्तर पर भी अफसरों के माध्यम से ही सत्यापन होता है। उन्होंने बताया कि दिलीप और विशाल का चरित्र प्रमाणपत्र वर्ष 2018 का बना हुआ है। वह कैसे बना, इसकी जांच पुलिस अफसर ही करा सकते हैं। उन्होंने कहा कि अगर चरित्र प्रमाण पत्र निरस्त होगा तो दुकानों के लाइसेंस भी निरस्त किए जाएंगे।
एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के नाम से चर्चित सीओ की पत्नी की दुकानें भी लापता : मनोज जायसवाल शराब सिंडिकेट में एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के तौर पर चर्चित अमरोहा में तैनात एक सीओ की भी मिलीभगत सामने आई है। बताया जा रहा है कि सीओ की पत्नी के नाम भी कई शराब की दुकानें बताई जा रही हैं। आबकारी विभाग इस मामले की भी जांच में हीलाहवाली कर रहा है। अफसरों का कहना है कि पहले उनके पते का सत्यापन कराया जा रहा है। उसके बाद दुकानों का सत्यापन कराया जाएगा। बता दें कि दो दिन पहले शराब सिंडिकेट में सीओ के शामिल होने और उनकी पत्नी के नाम पर शराब दुकानें होने की बात सामने आई थी। इस पर एडीजी राजकुमार ने मामले की जांच शुरू करने के निर्देश दिए थे।