बरेली। आशुतोष सिटी में रहने वाले सिद्धिविनायक इंस्टीट्यूट के कंप्यूटर साइंस के एचओडी मनीष वार्ष्णेय पर हमला करने आए कॉलेज के दो निलंबित छात्रों व एक टीचर समेत चार लोगों ने पब्लिक ने पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया। इनके पास से दो तमंचे भी बरामद दिखाए गए हैं। मनीष वार्ष्णेय का कहना है कि हमलावरों ने पहले उनके दरवाजे पर आकर उनके ऊपर एक फायर झोंका था। इस बीच वहां भीड़ जुट गई थी कुछ देर बाद ये लोग दुबारा आए तो भीड़ ने इन्हें पकड़ लिया।
सिद्धिविनायक इंस्टीट्यूट में कंप्यूटर साइंस के एचओडी मनीष वार्ष्णेय इज्जतनगर इलाके की आशुतोष सिटी में रहते हैं। मनीष ने पुलिस को बताया कि बुधवार रात तीन बाइक से छह युवक उनके दरवाजे पर आए। दरवाजा खटखटाने पर बाहर निकले तो उन्होंने एक फायर किया जो उनके सिर के ऊपर से गुजर गया। शोर मचाते हुए वह अंदर की तरफ भागे और हमलावर भी वापस चले गए । इस बीच कॉलोनी के लोग घरों से बाहर निकल आए थे। कुछ देर बाद फिर ये युवक उनके घर की तरफ आए तो कॉलोनी में ही रहने वाले एक पुलिस कर्मी की मदद से चार युवकों को पकड़ लिया गया। पकड़े गए युवकों में अमित गंगवार सिद्धिविनायक इंस्टीट्यूट में ही मैथ का टीचर है जबकि उसके साथ आया मनोज पुत्र जगतपाल निवासी जनकपुरी, सतीश पुत्र प्रेमपाल निवासी इंस्टीट्यूट में पॉलीटेक्निक सेकेंड ईयर के छात्र हैं, जिन्हें अनुशासनहीनता में निलंबित किया जा चुका है। चौथा आरोपी वैभव शर्मा पुत्र कृष्ण कुमार शर्मा निवासी अशरफ खां छावनी एबीवीपी का नेता है और एक निजी इंस्टीट्यूट से बीटेक कर रहा है। युवकों नेे अपनी बाइक का नंबर छिपाने को नंबर प्लेट पर मिट्टी पोत रखी थी।
कॉलेज सूत्रों के मुताबिक कुछ दिन पहले दोनों छात्रों को निलंबित करने वाली एक्शन कमेटी से मनीष वार्ष्णेय का कोई लेना देना नहीं था, फिर भी छात्र उन पर ही शक कर रहे थे और इसी कारण उन्हें जान से मारने आए थे। इसी रंजिश में सतीश ने कॉलेज के ही टीचर रजत मल्होत्रा को भी धमकी दी थी, जिसकी तहरीर उन्होंने भोजीपुरा थाने में दी थी। इधर, एसओ इज्जतनगर सतेंद्र यादव ने बताया कि पकड़े गए अमित और वैभव के पास से एक-एक तमंचा दो कारतूस और मनोज व सतीश के पास से दो कारतूस बरामद हुए हैं। मौके से भागे उनके दो अन्य साथियों की तलाश की जा रही है। उधर, पकड़े गए अमित गंगवार का कहना है कि उसके बहनोई रुकम गंगवार आशुतोष सिटी में रहते हैं। वह उनसे ही मिलने गया था और यहां पर तीनों छात्र उसे मिल गए। तभी शोर मचाने पर मोहल्ले के लोगों ने उन्हें घेरकर पुलिस को दे दिया। बरामद तमंचे भी उनके पास नहीं थे, जो पुलिस ने उनके पास रख दिए।